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हरिद्वार: सिडकुल की आरो कंपनी में ऑक्सीजन सिलिंडर फटने से धमाका, दो कर्मचारियों की मौत, तीन झुलसे 

Wed, 25 Sep 2019 10:00 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
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हादसे के बाद घायलों को ले जाती एंबुलेंस - फोटो : अमर उजाला
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मंगलवार की शाम हरिद्वार की सिडकुल फैक्ट्री में सुयज ड्रीपलेक्स वॉटर इंजीनियरिंग प्राईवेट लिमिटेड कंपनी में तेज धमाके के साथ ऑक्सीजन सिलेंडर फटने से चालक-परिचालक की मौत हो गई जबकि तीन कर्मचारी बुरी तरह घायल हो गए। 

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हादसा उस वक्त हुआ जब बहादराबाद की औद्योगिक इकाई से पहुंचे वाहन से चालक-परिचालक सिलिंडरों को उतार रहे थे। विस्फोट इतना जबरदस्त था कि दीवारें भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और शीशे चटक गए।

जिलाधिकारी दीपेंद्र चौधरी, एसएसपी सेंथिल अबुदई कृष्णराज एस ने घटनास्थल पर पहुंचकर घटनाक्रम की जानकारी ली। घायलों का इलाज सिडकुल के मेट्रो अस्पताल में चल रहा है।
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घटना मंगलवार शाम करीब चार बजे की है। सिडकुल की सुयज ड्रीपलेक्स वॉटर इंजीनियरिंग प्राईवेट लिमिटेड कंपनी में बड़े आरओ प्लांट बनाए जाते है। मंगलवार की शाम बहादराबाद की एक औद्योगिक इकाई से 20 सिलिंडरों से भरा वाहन लेकर चालक परिचालक कंपनी में पहुंचे थे। वे कंपनी के एक खुले स्थान में सिलिंडरों को उतार रहे थे। 

घायल मैट्रो अस्पताल में भर्ती

18 सिलिंडर उतारे जा चुके थे, लेकिन आखिरी के दो सिलिंडरों को उतारते हुए अचानक एक सिलिंडर तेज धमाके के साथ फट गया। परिणामस्वरूप मौके पर ही सिलिंडर उतार रहे चालक परिचालक की मौत हो गई, जबकि पास में ही मौजूद तीन कर्मचारी बुरी तरह जख्मी हो गए, जिन्हें तुरंत मेट्रो अस्पताल ले जाया गया।

घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे एसपी सिटी कमलेश उपध्याय ने बताया कि मृतकों की पहचान चालक नावेद (32) पुत्र अब्दुल हकीम एवं परिचालक अख्तर (20)पुत्र इश्तकार निवासी इब्राहिमपुर पथरी के रूप में हुई। 

घायलों के नाम कमल पुत्र गजोधर निवासी आसिफपुरा फतेहपुर यूपी, शेखर पुत्र संत निवासी शाहजहांपुर यूपी एवं गौरव पुत्र पूरण निवासी रामनगर ज्वालापुर है। बताया कि ऑक्सीजन का इस्तेमाल आरओ बनाने के दौरान वेलडिंग में होता है। इस संबंध में टेक्रीकल एक्सपर्ट की टीम को बुलाकर जांच कराई जा रही है। 
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शरीर के उड़े चीथड़े

इस हादसे की भेंट चढ़े चालक परिचालक के शरीर के चीथड़े उड़ गए। घटनास्थल पर सिर से पूरे बाल मांस के साथ ही उखड़कर दूर आ गिरे और मांस के लोथड़े भी जगह जगह पड़े हुए थे। यह दृश्य देखकर हर किसी का कलेजा मुंह को आ गया। साफ जाहिर होता है कि ऑक्सीजन सिलेण्डर में हुआ विस्फोट कितना जबरदस्त था। कंपनी की दीवारें एवं टूटे शीशे भी इसकी गवाह दे रहे है। 

घंटों तक नहीं उठाया शव
हादसे के बाद चालक परिचालक के क्षत विक्षत शव को भी कई घंटों तक उठाया नहीं जा सका। दरअसल, सिक्योरिटी के मददेनजर पुलिस फोर्स ने क्षत-विक्षत शव को उठाने का रिस्क नहीं लिया। क्योंकि यह अंदेशा था कि कही कोई दूसरा सिलिंडर न फट जाए, इसलिए पूरी एहतियात बरती गई। कुछ घंटों बाद पुलिस फोर्स ने ही आगे बढ़कर क्षत-विक्षत शव को कब्जे में लेकर मोर्चरी भेजा। 

फोरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य
फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल पर पहुंचकर साक्ष्य एकत्र किए। पूरे घटनास्थल की वीडियोग्राफी भी कराई गई है। फोरेंसिक टीम यह जानने  का प्रयास करेगी कि हादसा किस वजह से हुआ। ऑक्सीजन के सिलेण्डर में इतना प्रेशर कैसे था।
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