राजधानी दून में सिटी, स्कूल और स्टेट कैरेज बसें अब रफ्तार नहीं पकड़ पाएंगी। ऐसे में ओवर स्पीडिंग भी नहीं होगी और दुर्घटनाएं भी थमेंगी। गुरुवार से आरटीओ में इन 22 सीटर वाहनों में स्पीड गवर्नर लगने शुरू हो गए हैं।
जो वाहन पुराने हैं उन पर आरटीओ विभाग फिटनेस सर्टिफिकेट देते समय गवर्नर सिस्टम लगाएगा और नए वाहनों में रजिस्ट्रेशन के साथ ही सिस्टम फिट हो जाएगा। यह उपकरण केन्द्र सरकार मुहैया कराएगी।
स्पीड गवर्नर सिस्टम लगाने का शासनादेश
करीब दो माह पूर्व केन्द्र सरकार ने यह शासनादेश जारी किया था। उसके बाद उत्तराखंड सरकार ने भी सात नवंबर को सबसे पहले देहरादून जिले में स्पीड गवर्नर सिस्टम वाहनों में लगाने का शासनादेश जारी किया। शासनादेश के तहत फिलहाल उन वाहनों में स्पीड गवर्नर नहीं लगाया जाएगा जिनके पास ऑल इंडिया या स्टेट परमिट है।
अभी केवल साढ़े तीन टन से नीचे के वाहन ही इस दायरे में आएंगे। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) संदीप सैनी ने बताया अभी केवल स्कूल बस, सिटी बस, और कंपनी में चलने वाली बसें शामिल होंगी।
अधिकतम स्पीड अस्सी किमी प्रति घंटा
इन बसों में जो गवर्नर लगाया जा रहा है उसकी अधिकतम स्पीड अस्सी किमी प्रति घंटा रखी गई है। मतलब, ये वाहन अब अस्सी किमी प्रतिघंटा की स्पीड से आगे की रफ्तार नहीं पकड़े पाएंगे। वहीं शहर में अभी स्पीड और कम की जा रही है।
सिटी बसों के लिए यह सीमा 40 किमी प्रति घंटा करने पर विचार किया जा रहा है। गुरुवार से आरटीओ कार्यालय में गवर्नर लगने शुरू हो गए हैं। पहले दिन कुछ वाहनों का फिटनेस सर्टिफिकेट रोका गया है।
पहले लगाओ गवर्नर फिर मिलेगा फिटनेस
शासनादेश के तहत अब जब तक वाहनों में स्पीड गवर्नर नहीं लगाया जाएगा तब तक आरटीओ विभाग फिटनेस सर्टिफिकेट जारी नहीं करेगा। वहीं नए वाहनों का रजिस्ट्रेशन होते ही स्पीड गवर्नर लगा दिया जाएगा।