आपदा के बाद से प्रदेश की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था बदहाल हो गई है। इसका सबसे ज्यादा खामियाजा प्रदेश की औद्योगिक इकाइयों को भुगतना पड़ रहा है। इस वजह से उद्योगों के उत्पादन में 25 प्रतिशत तक की गिरावट आ गई है। ऐसे में कई उद्योगपतियों ने अपनी इकाइयों के विस्तार की योजना टाल दी है।
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इस साल गर्मी की शुरुआत से ही बिजली कटौती का सिलसिला शुरू हो गया था। मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने खुद ही कटौती का शेड्यूल जारी किया था। तभी से औद्योगिक इकाइयों में कटौती हो रही है। आपदा के बाद स्थिति और बदहाल हो गई है। रोजाना पूरे प्रदेश में कई घंटे की कटौती हो रही है। कई जगहों पर तो 15 घंटे तक बिजली गुल रहती है, जिसका असर उद्योगों पर दिखा। इस दौरान कई औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन ठप रहा।
राज्य में पहले जैसी बिजली की स्थिति नहीं रही। गर्मी हो या बरसात औद्योगिक क्षेत्रों में कटौती से उत्पादन पर असर पड़ रहा है। जिससे उद्यमियों ने इकाइयों के विस्तार की योजनाएं टाल दी हैं।
-पंकज गुप्ता, अध्यक्ष, इंडस्ट्रीज एसोसिएशन आफ उत्तराखंड
किस औद्योगिक क्षेत्र में कितनी देर बिजली गायब रहे, इसका कोई हिसाब-किताब नहीं है। इससे औद्योगिक इकाइयों को बड़े पैमाने पर मजदूरी का नुकसान उठाना पड़ रहा है। साथ ही उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है।
-महेश शर्मा, महासचिव इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन
केवल आपदा के दौरान औद्योगिक क्षेत्रों में अधिक बिजली कटौती की गई। अब चंद घंटे कटौती की जा रही है। इससे उद्योगों पर अधिक असर नहीं पड़ रहा।
-एके जौहरी, प्रबंध निदेशक ऊर्जा निगम
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