भगवान शिव, सती और गंगा की यह मायापुरी बाहरी नेताओं को खूब रास आती रही है। चुनाव के मेले में कई बाहरी नेता हरिद्वार की सीटों से चुनाव लड़ने आए और चुनकर विधानसभाओं में पहुंच गए।
दिल्ली सुप्रीम कोर्ट की वकालत करते हुए कामरेड आरके गर्ग हरिद्वार से चुनाव में उतरे और जीतकर विधानसभा पहुंच गए। उनके बाद पूर्वी उत्तरी प्रदेश से भेल में नौकरी करने आए रामयश सिंह हरिद्वार के विधायक बन गए। अलबत्ता बाद में वह हरिद्वार में ही बस गए।
इसी तरह सहारनपुर के महावीर राणा ने हरिद्वार से चुनाव लड़ा और यहां के दिग्गज अंबरीष कुमार को परास्त कर विधानसभा पहुंचे। बिजनौर के विरेंद्र सिंह, हरियाणा के आचार्य जगदीश मुनि और ऋषिकेश के शांति प्रपन्न शर्मा भी हरिद्वार परवादून सीट से विधायक बने।
लोकसभा चुनाव में भी रही यही स्थिति
रमेश पोखरियाल निशंक
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आजादी के तत्काल बाद हुए पहले चुनाव में सहारनपुर के अजित प्रसाद जैन संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़े और सांसद बन गए। अगले चुनाव में देहरादून के महावीर प्रसाद हरिद्वार के सांसद बने।
इसी तरह बिजनौर के गिरधारी लाल और उनकी मृत्यु के बाद उनके भाई सुंदर लाल हरिद्वार आकर सीधे संसद पहुंच गए। सहारनपुर के जगपाल सिंह ने हरिद्वार से सांसद की कुर्सी हासिल की।
सहारनपुर नागल के राम सिंह मांडेबास दो बार हरिद्वार के सांसद रहे। इसी तरह हरीश रावत और डा. रमेश पोखरियाल निशंक हरिद्वार के न होते हुए भी यहां से सीधे संसद पहुंच गए।
ram vilas paswan
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बाहरी नेताओं को हरिद्वार की यह भूमि केवल जिताती रही हो, ऐसा भी नहीं है। कई राष्ट्रीय स्तर के नेता ऐसे भी रहे जो आए तो जीतने, पर बुरी तरह हारकर वापस लौटे।
वर्तमान केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान वर्ष 1987 का संसदीय उप चुनाव हरिद्वार से लड़ा और जमानत राशि गंवा बैठे।
इसी प्रकार बसपा सुप्रीमो कुमारी मायावती ने दो बार हरिद्वार से लोकसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन यहां से लोकसभा नहीं पहुंच सकी।