कार्बेट टाइगर रिजर्व/नेशनल पार्क की कालागढ़ रेंज में हुई महिला का शिकार आदमखोर बाघिन ने नहीं बल्कि बाघ ने किया है। यह खुलासा खुद सीटीआर के निदेशक सुरेंद्र मेहरा ने किया है।
उन्होंने बताया कि घटनास्थल फायर लाइन के करीब पांच किमी अंदर कोर जोन के घने जंगल में हुई है। इस मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
आसपास दहशत का माहौल
कार्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) में महिला की मौत के बाद से जहां इससे सटे उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश के ग्रामीण अंचलों में दहशत का माहौल है, वहीं वन अधिकारियों में भी हड़कंप मचा है।
वन अधिकारियों ने सीटीआर के जंगलों की खाक छानकर बुधवार की शाम को यह खुलासा किया। घटनास्थल के आसपास बाघ के पंजे के साथ ही अन्य निशान मिले हैं। उन्होंने आदमखोर बाघिन के हमले से इकार किया है।
वन अधिकारियों के अनुसार घटना के बाद से ही सीटीआर की एसओजी और अधिकारियों की टीम जंगल में कांबिंग कर रही थी। उपनिदेशक डा. साकेत बडोला ने बताया कि क्षेत्र में गश्त तेज कर दी गई है। ढिकाला से हाथी भी मंगा लिए गए हैं।
पार्क में कोई बाघिन आदमखोर घोषित नहीं
उपनिदेशक डा. साकेत बडोला ने बताया कि कार्बेट टाइगर रिजर्व अथवा कार्बेट नेशनल पार्क में कोई बाघिन या बाघ आदमखोर घोषित नहीं है। जब तक चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन आदेश न कर दे, तब तक किसी भी वन्यजीव को यहां शूट नहीं किया जा सकता है।
यूपी में आदमखोर बाघिन के पार्क में घुसने की छानबीन की जा रही है। उसके पंजों के निशान लिए जाएंगे। तब उसका मिलान यूपी में आदमखोर घोषित बाघिन के पंजों से किया जाएगा। यदि बाघिन की पुष्टि हुई तो उसे बेहोश ही किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि अगला कदम आला अधिकारियों के दिशा निर्देश पर ही उठाया जाएगा। उन्होने दो टूक कहा कि अफजलगढ़ क्षेत्र की बाघिन को लेकर कांबिग की जा रही है। उसकी लोकेशन कालागढ़ नहीं है। हालांकि यूपी के वन विभाग के अधिकारी भी कालागढ़ पहुंचे हैं।
ट्यूशन पढ़ने तक नहीं निकले बच्चे
आदमखोर बाघिन के पार्क क्षेत्र में घुसने की खबर के बीच हुई महिला की मौत से कालागढ़ की केंद्रीय कालोनी में खौफ इतना अधिक बढ़ गया है कि बच्चे ट्यूशन पढ़ने तक नहीं गए हैं।
अभिभावकों रईस अहमद, सुरेन्द्र कुमार, जीवन सिंह, कनकुम सिंह का कहना है कि उनके बच्चे सुबह पांच बजे से ट्यूशन पढ़ने कालागढ़ जाते हैं। घटना के बाद से क्षेत्र में लोगों की सुरक्षा को खतरा बना हुआ है।
पर्यटकों को भी खतरा
कार्बेट टाइगर रिजर्व/नेशनल पार्क की कालागढ़ रेंज में वन्यजीवों के बढ़ते खतरे का असर पर्यटन पर भी पड़ सकता है। यहां पर्यटक खुली जिप्सी में पर्यटन के लिए आते हैं।
कालागढ़ से कार्बेट टाइगर रिजर्व का झिरना पर्यटन जोन से सीधा जुड़ा हुआ है। ऐसे में आदमखोर जोन में प्रवेश कर गया तो वहां देश विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए भी खतरा हो सकता है। हालांकि पार्क के निदेशक सुरेंद्र कुमार मेहरा का कहना है कि यह इलाका पर्यटन गतिविधियों से दूर है, दूसरे इस पर वाचिंग की जा रही है।