देहरादून जिले के धनपौ की महिलाएं अपने गांव को जैविक गांव के रूप में पहचान दिलाने के साथ ही ईको टूरिज्म को बढ़ावा दे रही हैं। जैविक गांव की पहचान मिलने के बाद अब दिल्ली, महाराष्ट्र सहित कई प्रदेशों से पर्यटक जैविक उत्पाद के लिए यहां पहुंच रहे हैं।
मसूरी और विकासनगर से 30 किलोमीटर दूर धनपौ गांव के ग्रामीणों ने जैविक खेती को अपनाया। 45 परिवारों वाले इस गांव में 30 हेक्टेयर से अधिक भूमि में गेहूं, मक्कास आलू, अरबी आदि की जैविक खेती होती है। इसकी शुरुआत दुर्गा महिला स्वयं सहायता समूह ने की।
इसकी अध्यक्षा मीना देवी बताती हैं कि 2002 में समूह का गठन कर जैविक खेती की शुरुआत की। अब तो इस गांव को अलग पहचान मिल चुकी है और दूसरे राज्यों के अलावा बाहर के देशों से भी लोग यहां की खेती देखने आते हैं।
ग्रामीण नारायण सिंह तोमर ने बताया कि समाज कल्याण विभाग के सहयोग से दुर्गा महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने गांव में जन मिलन केंद्र बनाया है। इसमें पर्यटकों के ठहरने की उचित व्यवस्था है, हमारी संस्कृति के साथ ही जैविक खेती को जानने के लिए देश-विदेश से पर्यटक यहां आते हैं।
आर्थिक स्थिति सुधरी, मिला स्वरोजगार
जैविक उत्पाद खरीदने और पर्यटकों के यहां आने से ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति सुधरी है। उन्हें गांव में ही स्वरोजगार मिला। यहां की महिलाएं बताती हैं कि 125 क्विंटल मक्का बीज हाल ही में तराई बीज विकास निगम को उपलब्ध कराया गया। पर्यटक भी जैविक उत्पाद के लिए यहां पहुंच रहे हैं।