सड़क हादसे में जान गंवाने वाले व्यक्ति के तीन आश्रितों को मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) ने बड़ी राहत दी है। बच्चों के बालिग होने और उन्हें पढ़ाई के लिए पैसों की जरूरत को देखते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नंदन सिंह की अदालत ने सोमवार को उनके नाम जमा तीन-तीन लाख रुपये की एफडीआर ब्याज सहित जारी करने के आदेश दिए हैं।
यह मामला मीर हसन बनाम मयंक कुमार आदि से जुड़ा है। अदालत ने 20 अगस्त 2019 को दावा याचिका पर सुनवाई करते हुए बीमा कंपनी के खिलाफ 23,69,123 रुपये का मुआवजा स्वीकृत किया था। उस वक्त ढकरानी गांव निवासी मृतक के तीनों आश्रित (कुमारी सुमैया परवीन, कुमारी रुकैया परवीन और जुनैद अहमद) नाबालिग थे। ऐसे में न्यायालय ने तीनों के भविष्य को सुरक्षित करते हुए उनके नाम तीन-तीन लाख रुपये की एफडीआर उनके बालिग होने तक जमा रखने के आदेश दिए थे।
अब तीनों आश्रित बालिग हो चुके हैं और उन्हें अपनी आगे की पढ़ाई के लिए इस धनराशि की आवश्यकता थी। इसे लेकर उन्होंने अदालत में एफडीआर जारी करने की गुहार लगाई थी। न्यायालय ने उनके आधार कार्ड में दर्ज जन्मतिथियों से उनके बालिग होने की कानूनी पुष्टि की। इसके बाद अदालत ने विकासनगर स्थित अल्मोड़ा अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह तीनों के नाम जमा तीन-तीन लाख रुपये की एफडीआर राशि, उस पर अर्जित ब्याज के साथ तत्काल उनके बैंक खातों में जारी करें।