डेढ़ सौ करोड़ से ज्यादा के बहुचर्चित दशमोत्तर छात्रवृत्ति घोटाले की अब विस्तार से जांच होगी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इसके आदेश दे दिए हैं। गहराई से पड़ताल होने पर समाज कल्याण विभाग के तमाम अफसरों के अलावा निजी कॉलेज संचालकों की हेरफेर पुख्ता होने की उम्मीद है।
सरकार के प्रवक्ता और कबीना मंत्री मदन सिंह कौशिक ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति के मद्देनजर यह फैसला लिया गया है। इसमें जो लोग भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि 27 मार्च 2017 को अपर सचिव वी. षणमुगम ने समाज कल्याण विभाग को छात्रवृत्ति घोटाले की जांच आख्या सौंपी थी। इसमें विकासनगर के 11 और सेवलाकलां के आठ छात्र-छात्राओं की छात्रवृत्ति से जुड़े मामलों में प्रारंभिक जांच का पूरा ब्योरा है।
देहरादून की ही तरह हरिद्वार जिले से जुड़े कुछ मामलों में साफ तौर पर यह बात सामने आई है कि कुछ बिचौलियों ने इन छात्रों के कागजात लेकर उनके दाखिले करा दिए। बैंक के खाते भी इनकी जानकारी के बगैर खुलवाए गए और विड्रॉल फॉर्म में दाखिले के वक्त ही छात्रों के हस्ताक्षर करवा लिए गए। बैंक की पासबुक भी इन्हें नहीं दी गई। लगभग सभी की हाजिरी भी नाम मात्र की रही।