वन विभाग की जमीन कब्जाने के मामले में प्रमुख वन संरक्षक जयराज ने डीएफओ लैंसडौन की पत्नी समेत सभी कब्जेदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने का आदेश दिया है। प्रमुख वन संरक्षक ने मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल को आदेश दिया है कि वे अवैध कब्जों को चिन्हित कर अभियान चलाकर जमीन को कब्जा मुक्त कराएं।
प्रमुख वन संरक्षक जयराज ने बृहस्पतिवार को विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर सहस्रधारा क्षेत्र में वन विभाग की जमीन पर हुए कब्जों को लेकर समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान विभागीय सर्वेयर ने बताया कि डीएफओ भूमि संरक्षण प्रभाग लैंसडौन इंद्रेश उपाध्याय की पत्नी ने वन विभाग की कुछ जमीन कब्जा कर रिसॉर्ट का निर्माण करवा लिया है।
इसके अलावा चमासारी, बगड़ाधोरण, समेत कई इलाकों में वन विभाग की जमीन पर कब्जा किया गया है। इसे गंभीरता से लेेते हुए प्रमुख वन संरक्षक जयराज ने बैठक में उपस्थित मुख्य वन संरक्षक जीसी पांडे व डीएफओ मसूरी कहकशां नसीम को निर्देशित किया कि तमाम कब्जेदारों को चिन्हित करने के साथ ही उनके खिलाफ नियमानुसार मुकदमा दर्ज कराया जाए। साथ ही अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाकर 15 दिन के भीतर विभाग की जमीन को कब्जामुक्त कराया जाए।
प्रमुख वन संरक्षक ने कहा कि इस प्रकरण में किसी भी विभागीय अधिकारी के स्तर पर लापरवाही बरती गई तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वह स्वयं 20 दिन बाद अधिकारियों के साथ दौरा कर कब्जा हटाने का भौतिक सत्यापन करेंगे।
डीएफओ ने कहा, कोई जमीन नहीं कब्जाई
डीएफओ लैंसडौन इंद्रेश उपाध्याय का कहना है कि जिस रिसॉर्ट को लेकर उनका नाम घसीटा जा रहा है वह उनकी पत्नी के नाम है। काश्तकारों से विधिवत जमीन खरीदकर रिसॉर्ट बनाया गया है। जिसके दस्तावेेज उनके व राजस्व विभाग के पास हैं। वन विभाग की जमीन कब्जाने के मामले में उन्होंने खुद ही मुख्यमंत्री समेत तमाम आला अधिकारियों को पत्र लिखकर जांच कराने का अनुरोध किया था।
सीमांकन के लिए सात लाख का बजट जारी
बैठक के दौरान मसूरी डीएफओ कहकशां नसीम ने कहा कि वन विभाग की जमीन के सीमांकन के लिए सात लाख रुपये के बजट की जरूरत है। इस पर प्रमुख वन संरक्षक जयराज ने मौके पर बजट जारी करने का आदेश दिया।