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उत्तराखंड विस सत्र 2018: लोकायुक्त पर सदन में जोरदार हंगामा, विपक्ष ने किया कार्यवाही का बहिष्कार

Mon, 24 Sep 2018 07:08 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
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prakash pant
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लोकायुक्त गठन की मांग को लेकर विपक्ष ने सोमवार को विधानसभा सदन वेल में आकर खूब नारेबाजी की और भोजनावकाश के बाद सदन की पूरी कार्यवाही का बहिष्कार किया। विपक्ष संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत के जवाब से संतुष्ट नहीं था।

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पंत का कहना था कि चूंकि भाजपा सरकार में लाया गया लोकायुक्त विधेयक सदन के निर्णय से विधानसभा की संपत्ति बना है, इसलिए उस पर बार-बार सवाल उठाए जाना उचित नहीं है। हालांकि उन्होंने कहा कि सरकार इसे लेकर गंभीर है और लोकायुक्त की नियुक्ति पर विचार करेगी। 

विपक्ष ने इस मसले को पहले नियम 310 में उठाने का प्रयास किया, लेकिन स्पीकर ने उसे नियम 58 में अनुमति दी। नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश ने कार्यस्थगन प्रस्ताव के तहत कहा कि सरकार भ्रष्टाचार पर गंभीर नहीं है। सरकार ने ही तीन महीन में लोकायुक्त लाने का वादा किया। वही बिल लाई। उसी ने उसे प्रवर समिति को भेजा। लेकिन आज उसका जीरो टॉलरेंस का नारा जुमला बनकर रह गया है।
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सरकार के वादे के मुताबिक लोकायुक्त नहीं बना पाई। उन्होंने सवाल पूछा कि सरकार लोकायुक्त कब बनाएगी? कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने लोकायुक्त के बहाने एनएच-74 की जांच को लेकर सवाल उठाए। विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल ने कहा कि सत्ता में बैठे लोग जब विपक्ष में थे, तो लोकायुक्त गठन की मांग करते थे, आज सत्ता में आने के बाद गंभीर नजर नहीं आ रहे। विधायक मनोज रावत ने भी सरकार की आलोचना की।

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पंत के जवाब से लोकायुक्त को लेकर उलझन

संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत के उत्तर से विपक्ष उलझन में पड़ गया। पंत का कहना था कि भाजपा सरकार में लाया गया लोकायुक्त विधानसभा की संपत्ति बन चुका है। अब वह सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। इसके बारे कार्यमंत्रणा समिति तय करेगी। अलबत्ता उन्होंने वर्ष 2011 में तत्कालीन सरकार से लेकर वर्तमान सरकार में लाए गए लोकायुक्त बिलों के बारे में सिलसिलेवार सूचना दी।

बताया कि 11 सितंबर 2011 को कैबिनेट ने लोकायुक्त बनाने का निर्णय लिया था। 31 अक्तूबर 2011 को लोकायुक्त अधिनियम पारित हुआ। 4 नवंबर को इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया। लेकिन 2014 में तत्कालीन सरकार ने 2011 के बिल को निरस्त कर दिया। उस विधेयक में छह माह के भीतर लोकायुक्त बनाने का प्रावधान था, जिसमें 23 दिसंबर 2014 को यह संशोधन किया गया कि लोकायुक्त की नियुक्ति से विधेयक विधेयक लागू हो जाएगा। लेकिन अभी विधेयक अस्तित्व में नहीं है। पंत के जवाब असंतुष्ट विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार लोकायुक्त के मसले को उलझा रही है।
  
हमने सरकार से भ्रष्टाचार के मसले पर जवाब मांगा था कि वह लोकायुक्त कब बना रही है। लेकिन वह जवाब देना चाहती है। हमने नहीं कहा था कि लोकायुक्त को प्रवर समिति को भेज दो, ऐसा उन्होंने खुद किया। जब हमारे सवालों के जवाब नहीं मिल रहे हैं तो सदन में जाकर हम क्या करेंगे। हमने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया। 
-डॉ. इंदिरा हृदयेश, नेता प्रतिपक्ष 
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