एचएमटी कंपनी में ऑपरेटर बलवंत सिंह के बेटे नीरज नेगी ने आर्मी कैडेट कोर की ग्रेजुएशन सेरेमनी में गोल्ड मेडल पाकर नाम रोशन किया है। वहीं, सिल्वर मेडल जीतने वाले सौरभ के पिता समीर दास कैटरिंग का काम करते हैं।
अन्य विजेता भी सामान्य परिवारों से ही ताल्लुक रखते हैं। आज उन्होंने साबित कर दिया कि मेहनत, संघर्ष और प्रतिभा के दम पर सफलता हासिल की जा सकती है। परिस्थितियां अनुकूल नहीं होने पर कुछ समय के लिए संघर्ष तो करना पड़ सकता है, लेकिन जब हालात सामान्य हों तब आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता।
कुसुमखेड़ा, हल्द्वानी निवासी बलवंत नेगी एचएमटी में ऑपरेटर हैं। तमाम परेशानियों के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दी।
कैटरिंग का काम करते हैं नीरज के पिता
acc graduation ceremony
- फोटो : AmarUjala
नीरज की प्रारंभिक शिक्षा सेंट थरेसा स्कूल से हुई। वर्ष 2011 में उन्होंने एयरफोर्स ज्वाइन किया, लेकिन संघर्ष जारी रखा। आखिर उन्हें इसका फायदा मिला और अब अफसर बनने की राह पर हैं।
पश्चिम बंगाल निवासी, रजत पदक विजेता सौरभ के पिता समीर दास कैटरिंग का काम करते हैं। घर वालों ने कई बार उनसे काम में हाथ बंटाने को कहा। लेकिन समीर के मन में देश सेवा का जुनून था। यही जुनून उन्हें पहले एएमसी में मेडिकल असिस्टेंट और अब आईएमए तक लेकर आया है।
पिता की मौत के बाद भी हासिल की सफलता
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पंजाब के शहीद भगत सिंह नगर निवासी इंद्रजीत के पिता निरवेर सिंह कारोबारी थे। 2005 में इंद्रजीत के एएमसी का हिस्सा बनने के अगले ही साल पिता का साया सिर से उठ गया। खजुरा, नेपाल निवासी और सर्विस सिल्वर मेडल प्राप्त चेतन थापा को सैन्य वर्दी पिता शेर बहादुर थापा से विरासत में मिली।
कांस्य पद विजेता और विज्ञान वर्ग में प्रथम रहे दिल्ली निवासी जय कुमार दीक्षित वर्ष 2005 में नौसेना में भर्ती हुए। वर्ष 2010 में पिता रामकिशन की मौत के बाद भी उन्होंने सफलता हासिल की।