दोनों ही विशेषज्ञों ने स्थायी समाधान के लिए परियोजना को कुछ समय के लिए बंद व सुरंग को खाली कर अंदर से रिसाव वाली जगह का ट्रीटमेंट करने की सलाह दी है, लेकिन यह संभव नहीं होने के चलते बाहर से ट्रीटमेंट की तैयारी है। इसके लिए जियो फिजिकल टेस्ट में रिसाव का केंद्र पता किया गया है।
वहींं, जियोलॉजिकल टेस्ट में 30 मीटर दायरे में चट्टान की प्रकृति पता की गई है। वहीं दो छेदों में ग्राउटिंग की गई है। वर्तमान में इन तीनों परीक्षणों की व्याख्या की जा रही है। निगम के अधिकारियों का कहना है कि सुरंग के बाहर से ट्रीटमेंट ग्राउटिंग विधि से ही किया जाएगा, लेकिन यह सीमेंट या केमिकल से किया जाएगा, यह विशेषज्ञों की सलाह पर तय होगा।
विशेषज्ञों की सलाह पर ही सुरंग से पानी के रिसाव का ट्रीटमेंट होगा। विशेषज्ञों की सलाह पर सुरंग के बाहर से ट्रीटमेंट की तैयारी है। अंदर से स्थायी ट्रीटमेंट निगम प्रबंधन के निर्णय पर ही संभव है।
- अमन बिष्ट, ईई जल विद्युत निगम।