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‘ऑपरेशन स्माइल’ लौटाएगा घर के चिराग

Thu, 01 Jan 2015 03:26 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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गुमशुदा मासूमों के इंतजार में पथरा चुकी सैकड़ों माता-पिता की आंखों में वर्ष 2015 चमक जगाने की उम्मीद लाया है। पुलिस उत्तराखंड में वर्ष 2000 से लापता बच्चों की तलाश के लिए ‘ऑपरेशन स्माइल’ शुरू करने जा रही है।
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एक जनवरी से प्रारंभ हो रहे अभियान के लिए हर जिले में टीमों का गठन कर लिया गया है। बुधवार को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) पुष्पक ज्योति ने सभी थाना प्रभारियों की बैठक लेकर उन्हें व्यक्तिगत रुचि लेकर अभियान को सफल बनाने का निर्देश दिया।

सात उपनिरीक्षक और 28 जवान तैनात तैनात
पुलिस लाइन में हुई बैठक में पुलिस मुख्यालय में तैनात अपर पुलिस अधीक्षक ममता बोरा को राज्य स्तरीय अभियान का नोडल अधिकारी बनाया गया है। दून जिले में सात टीमें गठित की गई हैं, जिनमें सात उपनिरीक्षक और 28 जवान तैनात हैं।
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वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पुष्पक ज्योति ने बताया कि समाज कल्याण विभाग, महिला एवं बाल विकास, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य कल्याण, अभियोजन, श्रम विभाग, विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं और बाल सहायता नंबर (चाइल्ड हेल्पलाइन) की मदद से यह अभियान चलाया जाएगा।

पुलिस अधीक्षक (शहर) अजय सिंह ने बताया कि क्षेत्राधिकारी (शहर) मनोज कात्याल को जनपद स्तर पर नोडल अधिकारी बनाया गया है।

यह होगी पुलिस कार्रवाई
- गुमशुदा बच्चों के 3-4 नवीनतम कलर फोटो प्राप्त करने के साथ एलबम तैयार करेंगे
- हर बच्चे के हुलिये के साथ उसकी पसंद, नापसंद, शौक, दोस्तों और रिश्तेदारों के पते और नंबर दर्ज किए जाएंगे
- बच्चा घर से खुद गया है तो इसके पीछे रही संभावित वजहें पता की जाएंगी
- पंजीकृत, गैर पंजीकृत संरक्षण गृहों और स्वयंसेवी संस्थाओं में भौतिक सत्यापन
- औद्योगिक क्षेत्रों, धार्मिक स्थलों, आश्रमों, होटलों और ढाबों में उन्हें तलाश किया जाएगा
- फेरी लगाने और भीख मांगने वाले बच्चों के बारे में जानकारी हासिल कर सत्यापन करेंगे
- बरामद बच्चों संग कोई अपराध घटित होना पाया गया तो दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई
- प्रत्येक दिन की कार्रवाई की रिपोर्ट नोडल अधिकारी को उपलब्ध करानी होगी

40 बच्चों की बरामदगी की चुनौती
वर्ष 2014 में जनवरी से लेकर दिसंबर तक दून से गायब हुए 40 बच्चों का सुराग लगाने की चुनौती रहेगी। वर्ष में 24 बालकों और 25 बालिकाओं की गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी, इनमें से नौ बरामद किए जा चुके हैं। बरामद बच्चों में तीन बालक और छह बालिकाएं शामिल हैं।
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