पुलिस कर्मचारियों को उनकी सेवाओं का वाजिब हक मिलना चाहिए। पुलिस के जवानों की क्षमताओं का मानवीय दृष्टि से सदुपयोग करने के लिए उनकी ड्यूटी का समय तय होना चाहिए, ताकि काम के अधिक दबाव से उनके मन में शोषण जैसी भावना पैदा न हो।
24 घंटे नौकरी करते हैं पुलिस के जवान
उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. अजीज कुरैशी ने पुलिस लाइन बैडमिंटन हॉल में सातवें ऑल इंडिया पुलिस बैडमिंटन चैंपियनशिप के उद्घाटन अवसर पर यह बात कही। राज्यपाल ने दीप प्रज्ज्वलित कर चैंपियनशिप का उद्घाटन किया।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पुलिस के जवान 24 घंटे नौकरी करते हैं। होली, दीपावली और ईद जैसे त्योहारों में घर से बाहर रहकर समाज की सुरक्षा के लिए तत्पर रहते हैं। वे भी इंसान हैं और उन्हें भी आराम की जरूरत होती है।
इसलिए समाज और राज्य की सेवा में समर्पित पुलिसकर्मियों की सेवाओं के बदले वाजिब हक दिलाने के लिए ठोस फार्मूला तैयार किया जाना चाहिए।
कहा कि उत्तराखंड में पुलिसकर्मियों के लिए ड्यूटी का समय तय होना चाहिए, जैसा कि अन्य राज्यों में है। इससे उन्हें भी अपने परिवार के साथ समय बिताने का वक्त मिलेगा। राज्यपाल ने आपदा राहत और पुनर्निर्माण कार्यों के लिए राज्य सरकार की सराहना की।
वित्त विभाग द्वारा सेना और पुलिस की योजनाओं के प्रस्ताव रोकने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि कुछ अधिकारी सभी फाइलें या तो वापस कर देते हैं या रोक देते हैं।
उद्घाटन समारोह में गृहमंत्री प्रीतम सिंह, प्रमुख सचिव गृह एमएच खान, पुलिस महानिदेशक डीएस सिद्धू, डीआईजी पीएसी अमित सिन्हा, डीआईजी गढ़वाल संजय गुंज्याल आदि मौजूद रहे।
पुलिस भी तो देरी से पहुंचती है...
राज्यपाल डॉ. अजीज कुरैशी ने उद्घाटन समारोह में देरी से पहुंचने पर उपस्थित लोगों से चुटीले अंदाज में माफी मांगी। उन्होंने कहा कि देरी के लिए क्षमा, लेकिन पुलिस कार्यप्रणाली में यह सही है। पुलिस हमेशा घटनास्थल पर देरी से पहुंचती है। उस लिहाज से पांच मिनट की देरी कुछ नहीं है।