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CM की सेवा में उत्तराखंड का इकलौता 'डॉक्टर'

Wed, 23 Jul 2014 01:57 PM IST
मनीष चंद्र भट्ट/ अमर उजाला, देहरादून
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नई दिल्ली एम्स से देहरादून लौटने के बाद मुख्यमंत्री हरीश रावत के स्वास्थ्य की निगरानी दून अस्पताल के करीब पांच डॉक्टरों के जिम्मे है।
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मरीजों की दिक्कतें बढ़ी
रोजाना की ड्यूटी में प्रदेश के इकलौते न्यूरो सर्जन डॉ. डीपी तिवारी भी शामिल हैं। ऐसे में दून अस्पताल में दूसरे न्यूरो सर्जन की नियुक्ति नहीं होने से रोजाना आने वाले न्यूरो संबंधी करीब 150 मरीजों की दिक्कतें बढ़ गई हैं।

सीएम के इलाज की ड्यूटी में करीब एक घंटे के बाद डा. तिवारी सिर्फ 50-60 मरीज ही देख पा रहे हैं। ऐसे में अधिकतर रोगी निजी अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर हैं।
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हालांकि, अफसरों को उम्मीद है कि अस्पताल में जल्द ही दूसरे न्यूरो सर्जन की नियुक्ति हो जाएगी। न्यूरो सर्जन मुख्य रूप से स्पाइनल कार्ड, नर्वस सिस्टम और दिमाग संबंधी बीमारियों का इलाज करते हैं।

दून अस्पताल में तैनात डॉ. डीपी तिवारी सरकारी सेवा के रूप में महज एक न्यूरो सर्जन हैं। उन पर उत्तराखंड और पश्चिमी यूपी, हिमाचल प्रदेश के पड़ोसी जिलों के मरीजों का दबाव है।

(नोटः इस खबर से संबंधित किसी भी सुझाव या सवाल के लिए मेल आईडी-manmeetr@ddn.amarujala.com और इस नंबर- 8392946711 पर संपर्क कर सकते हैं।)

वैसे भी सप्ताह में डॉ. तिवारी के तीन दिन आपरेशन थियेटर में गुजरते हैं। बचे दिनों में वह ओपीडी में मरीजों को देख पाते हैं। सामान्य दिनों में ही कई मरीजों को बिना इलाज के ही लौटना पड़ता है।
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डॉ. डीपी तिवारी का शेड्यूल
ओटी ड्यूटी : सोमवार, बुधवार, शुक्रवार। ओपीडी : मंगलवार, गुरुवार, शनिवार
दून अस्पताल में ओपीडी : सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक। सीएम के इलाज में: सुबह साढ़े नौ बजे से साढ़े दस बजे तक। शाम छह बजे के बाद भी एक घंटे।

न्यूरो सर्जन के पद स्वीकृत नहीं हैं। दून और हल्द्वानी अस्पताल में पांच-पांच सुपर स्पेशलिस्ट डाक्टर के लिए शासन से अनुरोध किया गया है। उम्मीद है कि जल्द ही मंजूरी मिल जाएगी।
-डॉ. जीएस जोशी, स्वास्थ्य महानिदेशक

वीआईपी ड्यूटी में होने की वजह से डाक्टर कई बार देरी से पहुंचते हैं। सरकार को न्यूरो के डाक्टर की कमी दूर करनी चाहिए, जिससे मरीजों को दिक्कत न हो।
- राकेश बडोनी, मरीज
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