जिले के विभिन्न गांवों में तैनात आशा कार्यकर्ताओं की ओर से दी जाने वाली प्रसव संबंधी रिपोर्ट में बीते तीन माह के भीतर जिले के 133 गांवों में एक भी बेटी पैदा नहीं होने का खुलासा होने से जिले में ही नहीं पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया है।
मामले पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने भी संज्ञान लेकर जिलाधिकारी को विस्तृत पड़ताल के निर्देश दिए हैं। शनिवार को डीएम डा. आशीष चौहान ने मामले में स्वास्थ्य विभाग के अलावा अन्य विभागों के साथ बैठक की, जिसमें डिप्टी सीएमओ डा. सीएस रावत ने बताया कि 133 गांवों में कई ऐसे भी हैं जहां बीते तीन माह में सिर्फ एक-एक प्रसव ही हुए हैं। ऐसे में उन्हें रेड जोन से बाहर रखा गया है।
बीते छह माह के आंकड़ों के आधार पर जिले में 16 गांव ऐसे हैं, जहां इस अवधि में एक भी बेटी पैदा नहीं हुई है। इनके अलावा 66 गांव ऐसे भी हैं, जहां छह माह में बेटियां तो हुईं लेकिन बेटों की तुलना में उनकी संख्या काफी कम है। अब इन 82 गांवों में बालिकाओं के घटते लिंगानुपात की जांच की जाएगी।
डीएम ने इन गांवों में जिलास्तरीय अधिकारियों को जांच का जिम्मा सौंपा है। प्रत्येक अधिकारी को तीन से चार गांव सौंपे गए हैं। इन गांवों में बीते छह माह के भीतर हुए प्रसव की पड़ताल की जाएगी। इसमें गर्भधारण के कौन से महीने में प्रजनन बाल स्वास्थ्य पोर्टल पर पंजीकरण हुआ, छह वर्ष के बच्चों में लिंगानुपात की स्थिति, परिवार के प्रोफाइल, पंजीकृत गर्भवती महिलाओं में से कितनी महिलाओं के प्रसव हुए आदि की पड़ताल की जाएगी। बैठक में डा. सुजाता सिंह, एसएस रावत, विनायक श्रीवास्तव, प्रभाकर सिंह, विजय प्रताप भंडारी, हेमलता पांडेय, दृष्टि आनंद, श्रुति वत्स आदि मौजूद रहे।
जिले में तीन माह के भीतर कुल 935 प्रसव हुए हैं, जिसमें 496 बालक और 439 बालिकाओं का जन्म हुआ। रेड जोन से बाहर जिले में 129 गांव ऐसे भी हैं, जहां बेटों की तुलना में पैदा होने वाली बेटियों की संख्या ज्यादा है। अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए गए हैं। अगले हफ्ते तक इसकी रिपोर्ट आने के बाद मामले में कार्रवाई की जाएगी।
डा. आशीष चौहान, डीएम उत्तरकाशी।
अमूमन गर्भधारण का तीन माह के भीतर लिंग का पता चल जाता है। ऐसे में तीसरे माह तक प्रजनन बाल स्वास्थ्य पोर्टल पर पंजीकरण हो जाना चाहिए। यदि पंजीकरण गर्भधारण के 4-5 माह बाद कराया गया है और इसमें बालक का जन्म हुआ है, तो प्रसव पूर्व लिंग जांच की आशंका जताई जा सकती है। जांच में नियुक्त अधिकारियों को पोर्टल पर उपलब्ध डाटा उपलब्ध कराया जा रहा है। जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
डा. सीएस रावत, डिप्टी सीएमओ उत्तरकाशी।