इस मांग को न्यायालय ने खारिज कर दिया था। बाद में अपील दाखिल करने पर सुप्रीम कोर्ट ने एम्स ऋषिकेश को आदेश जारी करते हुए कहा कि दस रविवार तक स्वामी सानंद के पार्थिव शरीर के दर्शन करवाने के लिए व्यवस्था बनाई जाए। 11 नवंबर से एम्स ऋषिकेश ने अंतिम दर्शन के लिए स्वामी सानंद का पार्थिव शरीर के दर्शन का इंतजाम किया।
स्वामी सानंद के दर्शन करने के लिए 11 नवंबर को कुल छह, 18 और 25 नवंबर को एक भी नहीं, दो दिसंबर को तीन, नौ दिसंबर, 16 दिसंबर और 23 दिसंबर को कोई भी अनुयायी नहीं पहुंचा। वहीं 30 दिसंबर को एक, छह जनवरी को एक, 13 जनवरी को दो अनुयायी ही स्वामी के पार्थिव शरीर के दर्शन को पहुंचे।
एम्स प्रबंधन के डर से नहीं गए दर्शन करने
मामले पर दयानंद का आरोप है कि वे एम्स प्रबंधन के डर से पार्थिव शरीर के दर्शन करने नहीं आए। उनका आरोप है कि पूर्व में 29 नवंबर को भी स्वामी आत्मबोधानंद को जबरन मातृसदन से एम्स लाकर जहर देने की कोशिश की गई थी। हमें आशंका थी कि एम्स गए तो प्रबंधन कोई भी अप्रिय घटना को अंजाम दे सकता था।