दिवाली पर ऑनलाइन शापिंग के दलालों से सावधान रहें अन्यथा आप दून के रायपुर निवासी समीर की तरह ठगी का शिकार बन सकते हैं।
दरअसल, समीर को एक हार्ड डिस्क की जरूरत थी, इसलिए उन्होंने ई कॉमर्स साइटों पर अपनी तलाश शुरू कर दी। एक साइट पर उन्हें महज 2400 रुपये में टू टीबी की हार्डडिस्क दिखाई दी, तो उन्होंने उसे खरीदने के लिए ऑनलाइन पेमेंट कर दिया, लेकिन इसके बाद उस साइट की ओर से न तो कोई कन्फर्मेशन मेल आया और न ही कोई एसएमएस।
12 दिन इंतजार करने के बाद जब उन्होंने उस वेबसाइट के कस्टमर केयर नंबर पर संपर्क करने के लिए नेट पर जाकर साइट सर्च की तो उस वक्त वह हैरत में पड़ गए जब वो साइट उन्हें नेट पर मिली ही नहीं। अब करें तो करें क्या, उन्हें तो उस वेबसाइट का नाम भी सही तरह से याद नहीं है।
दरअसल, दिवाली के नजदीक आते ही ई कॉमर्स साइटों पर ऑफरों की बाढ़ सी आ गई है। एक-दूसरे से ज्यादा डिस्काउंट और फ्री गिफ्ट देकर ज्यादा से ज्यादा ग्राहक खींचने की होड़ है। लेकिन इन दिनों कुछ फर्जी शॉपिंग साइटें भी ऑनलाइन ग्राहकों को दिवाली धमाका के नाम पर चूना लगा रही हैं। समीर भी एक ऐसी ही साइट के चक्कर में फंस कर ठगी के शिकार हुए।
सावधान! निशाने पर हैं ऑनलाइन कस्टमर
वेबसाइट का नाम अटपटा होने और पहली बार सुनने के बावजूद वह सस्ते के चक्कर में उसके शिकार हो गए। सिवाय पेमेंट ट्रांसफर करने के उनके पास इस खरीदारी का सबूत ही नहीं है। ऐसे में उन्होंने कौन सी साइट से कब और क्या खरीदा साबित करना मुश्किल है। ऐसे में ऑनलाइन खरीददारों को सतर्क होने की जरूरत है।
इन दिनों ग्राहकों को जानीमानी ई-कामर्स साइटों के नाम से लकी ड्रा जीतने के फोन आ रहे हैं। फोन करने वाले आपका पता, ई-मेल, अन्य मोबाइल नंबर आदि सबकी जानकारी देने के साथ ही यह तक बता देते हैं कि आखिरी बार आपने किस साइट से क्या खरीदा था।
इसके बाद दिवाली लकी ड्रा के नाम पर तीन लाख की ज्वेलरी या कार जीतने की खुशखबरी सुनाई जाती है। रजिस्ट्रेशन के नाम पर छह से 12 हजार जमा कराने की बात कही जाती है, एक बार पैसा जमा कराने के बाद फिर बार-बार पैसों की डिमांड की जाती है, लेकिन लकी ड्रा में जीता हुआ इनाम कभी नहीं भेजा जाता।
यहां तक कि कुछ दिन बाद वो फोन नंबर भी बंद हो जाता है। याद रखें कि कोई भी ई-कॉमर्श साइट जो भी ऑफर या लकी ड्रा आदि आयोजित करती है, उसकी जानकारी उसी साइट पर उपलब्ध होती है।
ऑनलाइन शॉपिंग करते वक्त यह बरतें सावधानी
- पहली बार जिस साइट का नाम सुना हो उससे दूर ही रहें तो अच्छा
- साइट क्रिएट होने की तारीख देख लें, ताजी साइट से परहेज कर
-किसी प्रोडक्ट की स्पेलिंग आदि में गलती दिखे तो साइट से सावधान हो जाएं
-ऑनलाइन पेमेंट करने की जगह कैश ऑन डिलीवरी का ऑप्शन चुनें
-कोई ब्रांडेड सामान बेहद ही सस्ता दिखे तो सतर्क हो जाएं
-जेन्युइन साइट डिस्काउंट तो दे सकती हैं मगर लुटाने वाली कीमत पर नहीं
-शॉपिंग के लोगो या लेबल पर क्लिक करें अगर पेज रिफ्रेश हो तो सही अगर ऐसा न हो तो सतर्क हो जाएं
-शॉपिंग करते वक्त अपनी खरीदारी से संबंधित रिकार्ड का प्रिंट निकाल लें, धोखाधड़ी की सूरत में यह काम आएगा।
-किसी साइट पर जरूरत से ज्यादा जानकारी बिल्कुल न दें।
-डेबिट कार्ड की जगह कम लिमिट वाले क्रेडिट कार्ड से करें
-मोबाइल से शॉपिंग में बेहतर रहेगा कि संबंधित साइट का एप डाउनलोड कर उसके माध्यम से खरीदारी करें। फर्जी शॉपिंग साइटों का मोबाइल एप नहीं होता।
-इंटरनेट पर मौजूद किसी भी साइट के यूआरएल में यदि http की जगह https लिखा हो तो वह विश्वसनीय है
-यूआरएल से पहले पेडलॉक भी उसके सेफ होने की निशानी है।
नेट पर मौजूद साइटों की हकीकत जानने के लिए कई तकनीकी तरीकें हैं पर आम लोगों के लिए उन्हें समझना थोड़ा कठिन होता है। उनके लिए बेस्ट विकल्प है रिव्यू पढ़ना। किसी भी साइट की हकीकत जानने के लिए नेट पर उसका रिव्यू पढ़ लें, इससे साइट की असली-नकली की पहचान होने के साथ ही उसकी सर्विस अच्छी है या बुरी आदि की भी काफी हद तक जानकारी मिल जाएगी।
-सर्वेश शर्मा, आईटी एक्सपर्ट