उत्तराखंड अब देश का ऐसा दूसरा राज्य है जो 100 करोड़ रुपये से लेकर एक हजार करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं को ऑनलाइन मंजूरी देगा।
उत्तराखंड दूसरा राज्य
उड़ीसा इस काम को पहले ही अंजाम दे चुका है और देश के अन्य 14 राज्य इस कोशिश में जुटे हैं। सोमवार को सचिवालय में केंद्रीय कैबिनेट अपर सचिव अनिल स्वरुप की उपस्थिति में ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया गया। दावा किया गया कि ऑनलाइन पोर्टल शुरू होने के बाद प्रदेश में पूंजी निवेश को बढ़ावा मिल सकेगा।
कुछ समय पहले ही पीएमओ सचिवालय में पीएमजी प्रकोष्ठ का गठन किया गया था। इस प्रकोष्ठ के जरिए पाइपलाइन में अटक कर रह जा रही परियोजनाओं को विभिन्न विभागों से तालमेल कर मंजूरी दिलवाना है।
पीएमजी यह पूरा काम ऑनलाइन ही करती है। केंद्रीय स्तर पर इस प्रकोष्ठ की स्थापना के बाद राज्य के स्तर पर इस काम की शुरूआत करना था। उड़ीसा पीएमजी प्रकोष्ठ की स्थापना कर चुका है। सोमवार को ऐसा करने वालों में देश के दूसरे राज्य के रूप में उत्तराखंड भी शुमार हो गया।
पीएमजी शुरू करने पर सहमति
अनिल स्वरूप के मुताबिक प्रदेश में पीएमजी 100 करोड़ से लेकर 1000 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं की मंजूरी के लिए काम कर सकेगा। देश में 14 अन्य राज्य भी पीएमजी शुरू करने पर सहमति जता चुके हैं। पीएमजी की मदद से राज्य या केंद्र में निवेश संबंधित कोई भी अड़चन ऑनलाइन दूर की जा सकेगी।
केंद्रीय स्तर पर अब तक करीब 5.3 लाख करोड़ रुपये की 150 परियोजनाओं को मंजूरी दिलवाई जा चुकी है। बताया गया कि राज्य से संबंधित निवेश की अड़चनों को स्टेट पोर्टल और केंद्र से संबंधित अड़चनों को नेशनल पोर्टल के जरिए दूर किया जाएगा। प्रमुख सचिव एस राजु, सचिव उमाकांत पंवार, अपर सचिव सीरविशंकर, पीएचडी चैंबर के पदाधिकारी और अन्य उद्यमी मौजूद थे।
गैस आधारित विद्युत परियोजनाएं दायरे से बाहर
काशीपुर की गैस आधारित विद्युत परियोजनाओं के मसले को भी उद्यमियों ने अपर सचिव अनिल स्वरूप के सामने उठाया। कहा गया कि 900 मेगावाट की इन परियोजनाओं को पिछले दो साल से मंजूरी नहीं मिल पाई है।
अनिल स्वरूप ने कहा कि ये परियोजनाएं पीएमजी के दायरे में नहीं आती। पीएचडी चैंबर ऑफ कामर्स की ओर से आयोजित इस बातचीत में उद्यमियों ने खुलकर पूंजी निवेश की अड़चनों पर बात की। अनिल स्वरूप के मुताबिक पीएमजी पोर्टल शुरू होने से निवेशकों की समस्याओं का बहुत हद तक समाधान हो पाएगा।
इसके साथ ही निवेश के लिए लंबा इंतजार करने की समस्या से भी छुटकारा मिल सकेगा। बातचीत में चैंबर की प्रदेश इकाई केचेयरमैन एसची कोचर, वीरेंद्र कालरा, क्षेत्रीय निदेशक अनिल तनेजा, उद्योग निदेशक नीरज खेरवाल, अपर निदेशक एससी नौटियाल सहित अन्य कई उद्यमी शमिल हुए।