पेंशन धारकों को उनके जीवत होने के लिए अनिवार्य जीवन प्रमाण बनाने के लिए कई किलोमीटर चल अब सरकारी दफ्तरों में लंबी कतार में खड़ा नहीं होना पड़ेगा।
सूचना प्रौद्योगिकी विभाग अपने कामन सर्विस सेंटर (देवभूमि जन सुविधा केंद्रों) के माध्यम से गांवों तक डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट बनाने की सुविधा देगा। आधार और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के जीवन प्रमाण पत्र के लिए करार हो रहा है। इसके बाद सेंटरों में अपने बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट या आयरिस स्कैनिंग करवा जीवित होने के प्रमाण दे सकेंगे।
सूचना प्रौद्योगिकी और आधार कार्ड निर्माता एजेंसी के साथ प्रस्तावित करार को न्याय विभाग से सेमवीकृति मिल गई है। एक बार बायोमेट्रिक डाटा और आधार कार्ड दस लाख पेंशन खातों से जुड़ गया तो हर वर्ष सिर्फ केंद्र में जाकर डिजिटल स्कैनिंग से जीवित होने का प्रमाण पत्र मिलता रहेगा।
सचिव सूचना प्रौद्योगिकी दीपक कुमार ने बताया कि पेंशन धारकों के लिए जीवन प्रमाण हर वर्ष देना अनिवार्य होता है। अधिकांश बुजुर्गों के पास डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट की ऑनलाइन सुविधा नहीं है।
ऐसे लोगों को सीएचसी के माध्यम से प्रमाण पत्र की सुविधा देंगे जिसके लिए आधार कार्ड निर्माता के साथ करार हो रहा है। राज्य का कोषागार डाटा आनलाइन है इससे हमारे केंद्र सीधे बायोमेट्रिक और आधार नंबर को पेंशन खातों से जोड़ देंगे।
जीवन प्रमाण की उपयोगिता
पेंशन के लिए हर वर्ष एक बार पेंशन धारक को जीवित होने का प्रमाण पत्र देना होता है। जीवन प्रमाण योजना के तहत अगर आपके पास आधार कार्ड नंबर है तो अपने पेंशन खाते को उससे जोड़ पंजीकृत करवा सकते हैं।
डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट के लिए जीवन प्रमाण केंद्र में जाकर अपना बायोमेट्रिक (फिंगर प्रिंट या आयरिस) देना होगा। यह केंद्र पेंशन वितरण एजेंसी बैंक, डीपीडीओ, ट्रेजरी कार्यालय, रेलवे, डाकघर, दूरसंचार एवं ईपीएफओ को आनलाइन भेंज देंगे।
12 सौ से तीन हजार होंगे सेंटर
सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के पास लगभग 12 सौ कामन सर्विस सेंटर हैं, जिनका इस्तेमाल सरकारी प्रमाण पत्रों जाति, हैसियत, मूल निवास आदि के लिए किया जा रहा है। विभाग अब प्रति 6 गांव एक सेंटर खोलने जा रहा है, जिसके लिए इनकी संख्या लगभग तीन हजार की जाएगी। शहरी क्षेत्रों में प्रति वार्ड एक सेंटर खुलेगा।