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महामहिम के एक साल, खास मुलाकात में कही दिल की बात

Fri, 08 Jan 2016 01:20 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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सरकार के काम में दखल नहीं देना, हर गतिविधि पर नजर रखने के साथ ही निरंतर मानिटरिंग और लीक से कुछ अलग हटकर करना राज्यपाल डॉ.कृष्णकांत पाल की आदत में शुमार है।
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डॉ. पॉल ने पिछले एक साल में कुछ ऐसी चीजें शुरू की जो पहले नहीं थी। मसलन, कुलपतियों का त्रैमासिक सम्मेलन, टीचर्स अवार्ड, अनुसंधान अवार्ड इत्यादि। पर्यटन के क्षेत्र में उनका मानना है कि पहले इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलप करना जरूरी है।

उन्होंने बहुत ही सलीके से दैनिक कार्यों में बगैर किसी झंझट के शासन को कई बार यह अहसास कराया कि राजभवन की अपनी मर्यादाएं जरूर है, लेकिन उसकी आंखे बंद नहीं है। शासन द्वारा कई मामलों में राजभवन के पत्रों का जवाब नहीं देने की प्रवृति पर उन्होंने इतना ही कहा कि यह किसी भी सरकार की कार्य संस्कृति पर निर्भर करता है।
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उनका मानना है कि राज्यपाल की अपनी लक्ष्मण रेखा होती है, इसलिए वह कभी एक्जीक्यूटिव बनने की कोशिश नहीं करते है। हालांकि यह कहने से वे नहीं चूकते कि सरकार के संवैधानिक प्रमुख तो हैं ही। उत्तराखंड के राज्यपाल के तौर पर आठ जनवरी को डॉ.पाल के कार्यकाल का एक वर्ष पूरा हो जाएगा। गुरुवार को पूरा होने पर स्टेट ब्यूरो चीफ अजित सिंह राठी ने एक वर्ष के कार्यकाल क केंद्र में रखकर उनसे खास बातचीत की। प्रस्तुत है, बातचीत के प्रमुख अंश-

यूनिवर्सिटी कैंपस को स्मार्ट करने पर फोकस

प्र: आपने उत्तराखंड में आज ही एक साल का पूरा किया है। नया वर्ष भी शुरू हो गया है, आने वाले समय के लिए क्या विजन है?
उ: काम तो सरकार कर ही रही है, लेकिन नए साल में मेरा फोकस विश्वविद्यालय परिसरों को स्मार्ट कैम्पस बनाने का है। ये कैम्पस, स्मार्ट सिटी की तर्ज पर होंगे। इनमें वाई फाई, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, बिजली की कम खपत, ग्रीनरी समेत तमाम वो चीजें होंगी जो स्मार्टनेस का मानक होती हैं। कई विवि ने इसके लिए पहल की है। राजभवन परिसर को भी स्मार्ट बनाने की पहल की है, पिछले साल के मुकाबले एक लाख रुपए की बिजली कटौती की है।

प्र: उच्च शिक्षा के क्षेत्र में और क्या जरूरी लगता है, क्या होना चाहिए ?
उ: विश्वविद्यालय नॉलेज क्रिएशन के केंद्र होते हैं। यहां पर नॉलेज क्रिएट होती है और स्कूलों में किताबों से ज्ञान दिया जाता है। वर्ल्ड रैंकिंग के लिए सबसे बड़ा आधार ही नॉलेज क्रिएशन व रिसर्च वर्क है। इसी को आगे बढ़ाना है। हमने बेस्ट रिसर्च कॉम्पिटिशन शुरू किया, एक स्कॉलर की रिसर्च को पेटेंट भी मिला है।

प्र: कौन से सेक्टर हैं जो ज्यादा आकर्षित करते हैं ?
उ: उच्च शिक्षा के अलावा एरोमेटिक सेक्टर में काम की काफी गुंजाइश और फायदा दोनों है। सैलाकुई स्थित एरोमेटिक सेंटर में बेहतरीन काम हुआ है। इसके विस्तार की जरूरत है। क्योंकि एरोमेटिक का बाजार बहुत बड़ा है। मैंने वहां का विजिट भी किया। इससे किसानों की आर्थिकी मजबूत होगी और खेती का ट्रेंड भी बदलेगा।

प्र: बीते वर्ष काफी राज्य भ्रमण किया, क्या महसूस किया और सरकार को क्या कोई सलाह दी है ?
उ: मैंने राज्य के रिमोट और बॉर्डर दोनों क्षेत्रों को नजदीक से देखा। सरकार को सलाह भी दी है, उम्मीद है जल्द काम होगा। बॉर्डर पर कनेक्टिविटी के संसाधन बहुत जरूरी हैं, कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहां अभी भी यही डिमांड है कि एक सप्ताह में कम से कम एक बार तो आवागमन के लिए गांव में बस आए।
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राज्यपाल डॉ. कृष्णकांत: ये किया लीक से हटकर

: पहली बार राज्य में सुमित्रानंदन पंत के रूप में किसी कवि पर स्मारक डाक टिकट जारी किया गया
: तीन वर्ष से कुलपति विहीन पंतनगर विवि का स्थाई कुलपति दिया, तकनीकी विवि व दून विश्वविद्यालय में कुलपति की नियुक्ति भी की।
: उच्च शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए त्रैमासिक कुलपति सम्मेलन शुरू किए
: 10वीं व 12वीं के छात्रों के लिए टॉपर्स गवर्नर्स अवार्ड शुरू किया।
: राजभवन में 10 सरकारी विवि के टॉपर्स का कॉन्क्लेव आयोजित किया
: राज्य के विश्वविद्यालयों के सर्वश्रेष्ठ मौलिक शोधार्थियों को गवर्नर्स अवार्ड दिया
: अर्द्ध कुंभ की तैयारियों की निरंतर समीक्षा की
: केदारनाथ धाम में पुनर्निर्माण कार्यों का जायजा लिया
: राजभवन में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन किया
: प्रयोग के तौर पर राजभवन में ट्यूलिप का रोपण किया जो केवल श्रीनगर में होता है
: राजभवन में नक्षत्र वाटिका स्थापित की
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