‘बूंद-बूंद से सागर भरता है’ कहावत को चरितार्थ करते हुए गांव, गंगा और हिमालय का अस्तित्व बचाने को नई पहल शुरू हुई है। आपका एक रुपये का योगदान इस पहल को साकार कर सकता है।
एकत्र हुआ यह पैसा गांव में पौधरोपण, स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च किया जाएगा। देश-विदेश में रह रहे उत्तराखंड के बाशिंदे इस पहल का हिस्सा बन सकते है।
इस अभियान को शुरू करने वाले पर्यावरण संरक्षण के विश्व प्रसिद्ध ‘मैती’ आंदोलन के संस्थापक और सेवानिवृत्त प्रवक्ता कल्याण सिंह रावत ने बताया कि उत्तराखंड से बड़ी संख्या में रोजगार और सुविधाओं के लिए गांव से देश विदेश में पलायन कर गया है।
गांव, गंगा, हिमालय और पर्यावरण खतरे में
kalyan singh rawat
- फोटो : amar ujala
कल्याण सिंह रावत ने बताया कि पहाड़ों में लाखों घरों में ताले पड़े हैं तो कई खंडहर बने हैं। गांवों के पारंपरिक जल स्रोत सूख रहे हैं। गांव, गंगा, हिमालय और पर्यावरण खतरे में हैं।
गांव से बाहर जा चुका आदमी गांव के लिए कुछ न योगदान करना चाहता है। इसी भावना को समझते हुए उन्होंने यह पहल की है। बताया कि उत्तराखंड से दूसरे प्रदेशों और देशों में रह रहा व्यक्ति अपने पूजा स्थल पर एक गुल्लक रख उसमें रोजाना एक रुपया एकत्र करेगा।
एकत्र हुए इस पैसे से हर गांव में एक पौधा रोपा जाएगा। पौधों से गदेरों में पानी बढ़ेगा, गदेरों का पानी गंगा में जाकर उसके अस्तित्व को बचाने का काम करेगा। इसके अलावा इस पैसे को गांव की स्वच्छता, स्वास्थ्य और शिक्षा पर खर्च किया जाएगा। इस पहल को रावत सोशल मीडिया और गोष्ठियों के माध्यम से प्रचार कर रहे है।
उनकी इस पहल से अब तक एक हजार से अधिक लोग जुड़ चुके है। बताया कि गुल्लकों को जून की छुट्टियों में पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर गांवों में पहले से अस्तित्व में रहे या नए बनने वाले इको विलेज क्लब के सामने खोला जाएगा।