पूर्व सैनिकों को वन रैंक वन पेंशन लागू करने के नाम पर चुनाव लड़ी कांग्रेस अभी लाभ नहीं दे पाई है। यूपीए सरकार ने बिना होमवर्क किये ही लाखों पूर्व सैनिक वोटों को रिझाने के लिए इसे चुनावी मुद्दा बना दिया।
आंतरिक बजट में पांच सौ करोड़ का प्रावधान कर एक अप्रैल से लागू करने का दावा तक कर दिया।
लेकिन हकीकत यह है कि अभी वन रैंक वन पेंशन लागू करने के लिए कंट्रोलर जनरल आफ डिफेंस अकाउंट्स (सीजीडीए) के अधीन गठित सात सदस्यीय वर्किंग ग्रुप की रिपोर्ट तैयार हो रही है। ऐसे में यूपीए सरकार ने गेंद अब आने वाली सरकार के पाले में डाल दी है।
चुनाव से पहले घोषणा करने में जल्दबाजी
10 वर्ष के शासनकाल में वन रैंक वन पेंशन को लागू नहीं कर पाने के बाद यूपीए ने लोकसभा चुनाव के ठीक पहले घोषणा करने में जल्दबाजी कर दी।
घोषणा के बाद कांग्रेस उसका चुनावी मायलेज लेने के लिए उतर पड़ी जबकि प्रक्रिया पूरी करने में सरकार का कार्यकाल समाप्त हो गया।
यूपीए सरकार के फरवरी में रखे अंतरिम बजट की घोषणा में पूर्व सैनिकों को वन रैंक वन पेंशन का प्रावधान उत्तराखंड के पौने दो लाख पूर्व सैनिकों और वीर नारियों के लिए बड़ी राहत थी।
कांग्रेस ने वन रैंक वन पेंशन की घोषणा करने के बाद अपना चुनावी अभियान देहरादून से शुरू किया। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने पूर्व सैनिकों को लुभावने के लिए घोषणा के तुरंत बाद 21 फरवरी को दून में रैली की।
राहुल ने जमकर किया प्रचार
राहुल ने रैली के अलावा पूर्व सैनिकों से अलग से मुलाकात कर उन्हें वन रैंक वन पेंशन के लाभ तो बताए ही साथ ही कांग्रेस के पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ को यूपीए सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले को घर घर पहुंचाने के निर्देश दिए।
वन रैंक वन पेंशन लागू करने के मुद्दे पर कांग्रेस ने 30 अप्रैल तक मतदान के विभिन्न चरणों में स्थिति साफ नहीं की, जब पूर्व सैनिकों के खातों में बढ़ी हुई पेंशन नहीं आई तो साफ हुआ कि मामले में अभी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। ऐसे में अब पूर्व सैनिकों को और इंतजार करना पड़ सकता है।
वर्किंग ग्रुप रिपोर्ट आने का इंतजार
अंतरिम बजट में वन रैंक वन पेंशन का प्रावधान करने के बाद 26 फरवरी को रक्षामंत्री एके एंटनी के अधीन बैठक हुई, जिसमें वर्किंग ग्रुप बनाने का फैसला हुआ जिसके जिम्मे पेंशन विसंगति दूर करने की सिफारिश की गई है।
पहले बैठक के बाद दूसरी बैठक 22 अप्रैल को रक्षामंत्री एंटनी के अधीन हुई, जिसमें वर्किंग ग्रुप गठित किया गया। 24 अप्रैल को मंत्रालय के पेंशन विभाग से वर्किंग ग्रुप बनाने के शासनादेश जारी हुआ, जिसमें सीजीडीए के अधीन सात अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई।
शासनादेश में सीजीडीए को तीन सप्ताह के भीतर वन रैंक वन पेंशन के वित्तीय बोझ से लेकर उसे लागू करने की रिपोर्ट पेश करनी है, जिसके आधार पर फंड की मांग रक्षा मंत्रालय करेगा।