चुनाव के लिए अप्रैल-मई का मौसम अनुकूल
समिति अध्यक्ष पीपी चौधरी का कहना है कि आज भी कई चुनाव एक साथ होते हैं, तो क्या यह गलत है। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान चार करोड़ 85 लाख श्रमिक देश में इधर से उधर आते-जाते हैं। इससे उद्योगों पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि मौसम भी चुनाव को प्रभावित करने वाला प्रमुख कारक है। उन्होंने अप्रैल-मई में एक साथ चुनाव कराने पर जोर दिया।
सरकार बदली तो नई सरकार तय समय तक ही होगी
अध्यक्ष चौधरी का कहना है कि एक देश, एक चुनाव की पांच साल की समयसीमा तय हो जाएगी। अगर इस बीच केंद्र या राज्य की सरकार गिरती है तो राष्ट्रपति शासन लगता है या दोबारा चुनाव होता है तो बचे हुए समय के लिए ही नई सरकार होगी। निर्धारित पांच साल बाद दोबारा एक साथ चुनाव होंगे। कांग्रेस के विरोध के सवाल पर उन्होंने कहा कि जब हम उन्हें पूरे लाभ बताएंगे तो हो सकता है कि वे भी इसके पक्ष में आ जाएं। उन्होंने ये भी कहा कि अविश्वास प्रस्ताव को लेकर जापान या जर्मन जैसा मॉडल भी अपनाया जा सकता है, जिसमें हाउस के भीतर फ्लोर पर ही नया सीएम या पीएम चुनने के प्रावधान होते हैं।