सिडकुल स्थित आर्चित प्लाइवुड फैक्ट्री में शनिवार शाम धमाके के साथ ऑक्सीजन सिलेंडर के फटने से एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि पांच लोग बुरी तरह जख्मी हो गए।
इनमें से दो की हालत गंभीर बनी हुई है। घायलों का सुशीला तिवारी अस्पताल में इलाज चल रहा है। इधर धमाके की सूचना पर एएसपी समेत कई पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे।
सिडकुल के सेक्टर नौ स्थित फैक्ट्री आर्चित प्लाइवुड में शनिवार को भूतबंगला रुद्रपुर निवासी ठेकेदार गुफरान अपने कर्मियों के साथ एयर कंडीशनरों की मरम्मत कर रहा था।
एसी ठीक करते समय हुआ हादसा
इस दौरान वहां फैक्ट्री के दो इलेक्ट्रिशियन भी मौजूद थे। शाम करीब चार बजे मरम्मत के दौरान ऑक्सीजन का सिलेंडर तेज धमाके के साथ फट गया। इसकी चपेट में आकर ठेकेदार गुफरान के अलावा साथ काम कर रहे गांधी कॉलोनी रुद्रपुर निवासी मसकूर, सितारगंज निवासी सलीम और भूतबंगला निवासी शाहिल, फैक्ट्री के इलेक्ट्रिशियन गाजीपुर निवासी मनोज कुमार और मोतीपुर दिनेशपुर निवासी देवदत्त गंभीर रूप से घायल हो गए।
धमाके के बाद फैक्ट्री में अफरातफरी मच गई। फैक्ट्री के एचआर हेड संजय सिंह और अन्य कर्मियों ने वहां पहुंचकर घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया। यहां प्राथमिक उपचार के बाद देवव्रत को छोड़कर पांचों घायलों को हल्द्वानी रेफर कर दिया गया।
सुशीला तिवारी अस्पताल में उपचार के दौरान मनोज कुमार ने दम तोड़ दिया, जबकि दो की हालत गंभीर है। सूचना मिलने पर एएसपी देंवेंद्र पिंचा और सीओ स्वतंत्र कुमार दल बल के साथ घटनास्थल पहुंचे। उन्होंने फैक्ट्रीकर्मियों से से घटना की जानकारी ली, साथ ही जिला अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल भी जाना।
लीकेज या अधिक गैस हो सकती है धमाके की वजह
फैक्ट्री में ऑक्सीजन का सिलेंडर फटने की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। यहां सिलेंडर फटने का कारण सिलेंडर लीकेज या उसमें अधिक गैस होना माना जा रहा है।
एचआर हेड संजय सिंह ने बताया कि ऑक्सीजन का सिलेंडर मेंटेनेंस के लिए प्रयोग में लाया जाता है। हर छह माह में फैक्ट्री के अंदर एयरकंडीशनरों की मरम्मत का काम होता है। इसी क्रम में शनिवार को भी मरम्मत हो रही थी।
रुद्रपुर से रेफर होकर आए मनोज कुमार ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था, जबकि मसकूर और सलीम की हालत गंभीर बनी हुई है। दोनों 40 प्रतिशत तक जले हुए हैं, वहीं गुफरान और साहिल 15 से 20 प्रतिशत तक जले हैं। सभी को बर्न वार्ड में डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। 48 घंटे सभी के लिए गंभीर हैं।
-डॉ. हिमांशु सक्सेना, प्लास्टिक सर्जन एसटीएच