राजधानी में हो रही नॉर्थ जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस के पहले दिन वन समुदायों के अधिकारों और जेल सुधार पर मंथन हुआ। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों और उत्तराखंड के मुख्य न्यायाधीश की मौजूदगी में न्याय तक पहुंच को सशक्त बनाने पर चर्चा की गई।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नाल्सा) के तत्वावधान में उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल की ओर से आयोजित नॉर्थ जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस का शनिवार को शुभारंभ हुआ। इस वर्ष सम्मेलन की थीम इनहैंसिंग एसेस टू जस्टिस रखी गई है। विभिन्न सत्रों में न्याय तक आमजन की पहुंच को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए गहन चर्चा की गई। पहले सत्र में वन समुदायों के अधिकारों एवं वन अधिकार कानून 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। इस दौरान वन गुज्जर समुदाय के प्रतिनिधियों ने भी अपने अनुभव और सुझाव साझा किए। वहीं दूसरे सत्र में जेल सुधार पर चर्चा करते हुए बंदियों के अधिकार, न्यायिक सहायता और सुधारात्मक उपायों पर महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए। यह सम्मेलन न्याय प्रणाली को अधिक समावेशी, सुलभ और मानव-केंद्रित बनाने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है। इसका उद्देश्य समाज के वंचित और कमजोर वर्गों तक न्याय की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करना है।
कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जे. के. माहेश्वरी, एन. कोटेश्वर सिंह और संदीप मेहता के साथ ही उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता शामिल हुए। सम्मेलन में उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष मनोज कुमार तिवारी, उत्तराखंड लीगल सर्विसेज कमेटी के अध्यक्ष आलोक कुमार वर्मा और उत्तर भारत के विभिन्न उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों ने भी सहभागिता की। कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण देहरादून की सचिव सीमा डुंगराकोटी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।