कब, कहां और किससे दिल लग जाए यह कहना बड़ा मुश्किल है। आखिर दिल तो दिल ही है ना, कई बार नादानी भी कर देता है।
अपने उम्रदराज हरदिल अजीज चचा गालिब का दिल पिछले दिनों एक जवान मोहतरमा पर आ गया। उम्र का फर्क इतना बड़ा है कि इस दास्तान-ए-इश्क पर किसी को यकीं नहीं होगा भी कैसे।
चचा के दिल में लगी आग के सबूत तो किसी के पास नहीं है लेकिन मोहतरमा को एक महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त करने की सिफारिशी चिट्ठी हुकूमत को जिस असरदार ढंग से लिख डाली उससे दिल के इरादे प्रदर्शित हो गए लगते हैं।
हालांकि, हुक्मरानों ने चचा को बहुत समझाया कि पद महत्वपूर्ण है यदि कोई और नाम बता दिया जाए तो सूबे के हित में होगा। लेकिन चचा नहीं माने और जिद पर अड़ गए। मोहतरमा का ऐसा जादू चला कि चचा पूरी तरह से मोहपाश में हैं। रिश्ता मोहब्बत का हो या इंसानियत का लेकिन गहराई नापना किसी के वश की बात नहीं है।
दिल की लगी और दिल्लगी में फर्क नापना भी मुश्किल है। अब मजे की बात यह है कि जल्द ही मोहतरमा की ताजपोशी एक बेहतरीन पद पर होने वाली है। इस मोहतरमा के साथ ही एकाध और की नैय्या भी पार लगने उम्मीद है।