प्रदेश में 15 साल से पुराने वाहन कबाड़ बनने शुरू तो हो गए, लेकिन निपटारा कैसे होगा, अभी तक तय नहीं है। उत्तराखंड सहित कई राज्यों में इन वाहनों को स्क्रैप में लेने के बाद आगे की प्रक्रिया व वाहन स्वामी को प्रोत्साहन का फार्मूला तय नहीं हो पा रहा, क्योंकि यह बेहद खर्चीला है, जिसे उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य वहन करने में सक्षम नहीं हैं।
दरअसल, स्क्रैप नीति आने के बाद अब इसे लागू करना काफी खर्चीला है। परिवहन मंत्रालय ने 50 करोड़ रुपये प्रोत्साहन राशि के तौर पर देने का प्रावधान किया है, जबकि इसके लिए हर जिले में स्क्रैप कलेक्शन सेंटर संग वाहन स्वामी के लिए वाहन टैक्स में छूट जैसा प्रावधान राज्य के स्तर से किया जाना है। अगर टैक्स में छूट दी जाएगी तो इसे राज्य का राजस्व प्रभावित होगा।
लिहाजा, स्क्रैप पॉलिसी की राह में रुकावटें बहुत हैं। परिवहन आयुक्त एवं सचिव परिवहन अरविंद सिंह ह्यांकी का कहना है कि कई राज्यों में बेहद खर्चीला होने की वजह से यह प्रावधान अटका हुआ है। उन्होंने बताया कि सरकार अभी इस पर विचार कर रही है। पार्किंग नीति के हिसाब से कैसे काम किया जाएगा, जल्द ही इस पर निर्णय होगा।
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5,500 सरकारी वाहन कैसे बनें कबाड़
पिछले दिनों प्रदेश के कई सरकारी महकमों में 15 साल से पुराने वाहनों को सड़कों से हटा दिया गया। स्क्रैप पॉलिसी के तहत नियमावली न बनने की वजह से यह अटके हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस पर निर्णय लिया जा सकता है।