मरीज को दून अस्पताल में भर्ती कराया गया था। दून मेडिकल कालेज के ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. विकास सिकरवार व एनेस्थिीशिया के विभागाध्यक्ष डॉ. अतुल सिंह ने ऐसोफेगोस्कोपी की मदद से कई घंटे की जद्दोजहद के बाद नकली जबड़े को बाहर निकाला।
डॉ. प्रदीप भारती गुप्ता ने बताया कि मरीज हृदयरोग से भी पीड़ित है। इसलिए उनके इलाज में विशेषज्ञों को काफी दिक्कत आई।
नकली जबड़े में तार की जाली होने की वजह से आंत के फटने का भी खतरा था। लेकिन गनीमत रही कि बगैर किसी भी नुकसान के नकली जबड़े को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।