ओखली के साथ गायब हो रही आंगन की रौनक
बजलाड़ी गांव के पूर्व प्रधान जयेंद्र सिंह राणा का कहना है कि ओखली महिलाओं को टीम वर्क के रूप में कार्य करने के लिए प्रेरित करती थी। महिलाएं जब सामूहिक रूप से ओखली में धान कूटती थी, तो उनका मनोरंजन होता था और वह एक दूसरे के साथ सुख-दुख भी साझा करती थी। जिससे घर के आंगन में चहल-पहल रहती थी। आज आंगन की रौनक भी गायब हो गई है।
ओखली में तैयार अनाज पौष्टिक होता था। साथ ही यह आपसी सहभागिता व जुड़ाव का माध्यम थी। ओखली में धान कूटने से शरीर भी स्वस्थ रहता था। अब मशीनों में तैयार अनाज से करीब 50 प्रतिशत तक पोषक तत्व गायब हो जाते हैं। ओखली को बचाने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए। -द्वारिका प्रसाद सेमवाल, प्रणेता गढ़ भोज अभियान।