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CM ऑफिस के नाम पर हुए तेल घोटाले में केस दर्ज

Mon, 09 Feb 2015 10:43 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड मुख्यमंत्री कार्यालय के नाम पर स्वास्थ्य विभाग में हुए करोड़ों रुपए के तेल बिल घोटाले में देहरादून के दो ट्रैवल एजेंसी संचालकों पर मुकदमा दर्ज किया गया है।
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दोनों एजेंसी संचालकों ने 27 लाख रुपए की रकम फर्जी बिलों के जरिये प्राप्त की थी। मामले में हरिद्वार, टिहरी और ऊधम सिंह नगर के कुछ ट्रैवल एजेंसी संचालकों पर पहले ही मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। दून के मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एसपी अग्रवाल ने रविवार को शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया।

बताया कि मैसर्स उनियाल टूर एंड ट्रैवल्स पंडितवाड़ी ने वर्ष 2009 से 2013 तक मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय से किराये पर टैक्सी देने के एवज में पांच लाख ढाई हजार रुपए का भुगतान लिया। इसी तरह काला टूर एंड ट्रैवल्स, मोथरोवाला ने भी 22.23 लाख रुपए का भुगतान लिया।
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दोनों एजेंसी संचालकों ने अपने बिलों में तत्कालीन मुख्यमंत्री को भ्रमण में ले जाने के लिए टैक्सी देने की बात कही थी। डॉ. अग्रवाल ने बताया कि बाद में जांच में मालूम हुआ कि एजेंसियों द्वारा दिए गए कई बिल और हस्ताक्षर फर्जी है। इस काम में कुछ अज्ञात अभिकर्ताओं (एजेंट) ने भी एजेंसी संचालकों का साथ दिया।

कोतवाली पुलिस ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ ठगी, कूटरचना से दस्तावेजों में हेराफेरी समेत धोखाधड़ी की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जल्द ही स्वास्थ्य विभाग से मुकदमे से जुड़े दस्तावेज लिए जाएंगे।

गत वर्ष आडिट में खुली थी गड़बड़ियां
उत्तराखंड में एक के बाद एक तीन मुख्यमंत्री बदलते गए और स्वास्थ्य विभाग में तेल बिल घोटाला चलता रहा। खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री भाजपा और कांग्रेस, यानी अलग-अलग दलों के रहे। इसके बावजूद घोटालेबाजों के कदम नहीं थमे।

मुख्यमंत्री कार्यालय के फर्जी पत्र जारी करने का सिलसिला चलता रहा और इनके जरिये चार जिलों के स्वास्थ्य अधिकारी करोड़ों रुपये का भुगतान करते रहे। गत वर्ष आडिट में खुलासा न होता तो शायद खेल आगे भी जारी रहता। इसके बावजूद मामले में लापरवाह बना रहा स्वास्थ्य विभाग खुलासे के तीन माह बाद भी सुस्त बना रहा।

आरोपियों पर मुकदमा दर्ज कराने के आदेश में तीन माह लग गए। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि मामला मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़ा होने की वजह से मंत्रालय इस पर फूंक फूंककर कदम रख रहा था।

इस तरह हुआ घोटाला
वर्ष 2009 से 2013 तक देहरादून, टिहरी, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर के मुख्य चिकित्साधिकारियों और दून अस्पताल, कोरोनेशन के चिकित्सा अधीक्षकों समेत तेरह चिकित्सा अधिकारियों के पास विभिन्न ट्रैवल एजेंसी संचालकों ने वाहनों के पेट्रोल-डीजल के बिल भेजे।

बिलों में यह जिक्र किया गया था कि ये वाहन मुख्यमंत्री कार्यालय के आदेश पर मुख्यमंत्री के विभिन्न कार्यक्रमों, भ्रमण में शामिल थे। बिल के साथ मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी आदेश और अधिकारियों के हस्ताक्षर भी होते थे।

ऐसे में स्वास्थ्य अधिकारी इसे मुख्यमंत्री का आदेश मान भुगतान करते गए। बाद में मालूम हुआ कि मुख्यमंत्री कार्यालय के ये पत्र और अधिकारियों के हस्ताक्षर फर्जी थे।

दून अस्पताल के पीएमएस आज कराएंगे मुकदमा
दून अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरएस असवाल सोमवार को शहर कोतवाली में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराएंगे। कोरोनेशन अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. भारती राणा शुक्रवार को डालनवाला थाने में शिकायत दे चुकी हैं।

मुकदमा कराने वाले भी आरोपी
ट्रैवल एजेंसियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने वाले कुछ मुख्य चिकित्सा अधिकारियों और अस्पतालों के चिकित्सा अधीक्षक भी घोटाले में आरोपी हैं। सूत्रों के अनुसार, जांच रिपोर्ट में इन चिकित्सा अधिकारियों को भी दोषी माना गया है। ऐसे में विभाग द्वारा इन दोषी चिकित्साधिकारियों के जरिये मुकदमा दर्ज कराने पर भी सवाल उठने लगे हैं।

अलग-अलग मुकदमे क्यों?
स्वास्थ्य महानिदेशक की ओर से अलग-अलग सीएमओ और अस्पतालों के अधीक्षकों को अपने-अपने क्षेत्र के थानों में मुकदमा दर्ज करने के निर्देश पर भी सवाल उठ रहे हैं। कानूनी जानकारों का कहना है कि एक ही घोटाले की विवेचना अलग-अलग पुलिस अधिकारियों द्वारा करने से जांच प्रभावित होगी।

डालनवाला थाना पुलिस द्वारा कोरोनेशन अस्पताल की अधीक्षक द्वारा दी गई शिकायत पर दो दिन बाद भी इसी वजह से मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। कानूनी जानकारों का कहना है कि स्वास्थ्य महानिदेशक चाहते तो पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर किसी एक ही थाने में मुकदमा दर्ज करा सकते थे। ऐसा क्यों नहीं किया गया, यह सवाल उभरने लगा है।
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