भारतीय चिकित्सा परिषद की ओर से आयुर्वेद डॉक्टरों का पंजीकरण किया जाता है। बीएमएस कोर्स करने के बाद प्रशिक्षु डॉक्टरों को एक साल इंटर्नशिप के लिए परिषद में अस्थायी पंजीकरण किया जाता है।
भारतीय चिकित्सा परिषद उत्तराखंड में फर्जी आयुर्वेद डॉक्टरों का पंजीकरण मामले से सबक लिया है। अब परिषद पंजीकरण के लिए ऑफलाइन व्यवस्था को बंद कर ऑनलाइन की तैयारी कर रहा है। मार्च तक पंजीकरण की ऑनलाइन व्यवस्था शुरू हो जाएगी।
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भारतीय चिकित्सा परिषद की ओर से आयुर्वेद डॉक्टरों का पंजीकरण किया जाता है। बीएमएस कोर्स करने के बाद प्रशिक्षु डॉक्टरों को एक साल इंटर्नशिप के लिए परिषद में अस्थायी पंजीकरण किया जाता है। इंटर्नशिप करने के बाद ही डॉक्टरों का स्थायी पंजीकरण होता है।
इसके बाद ही आयुर्वेद डॉक्टर निजी अस्पतालों या क्लीनिक में इलाज कर सकते हैं। अभी तक परिषद में डॉक्टरों के पंजीकरण की प्रक्रिया ऑफलाइन होती है। फर्जी पंजीकरण के बाद परिषद ने अब ऑनलाइन व्यवस्था की तैयारी कर रहा है। इसके लिए एजेंसी से साफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है।
एसटीएफ ने प्रदेश में फर्जी दस्तावेजों पर आयुर्वेद डॉक्टरों का खुलासा किया था। जांच में फर्जी पंजीकरण कराने में संलिप्त परिषद के तीन कर्मचारियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इससे परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए। तीन कर्मचारी 2005 से परिषद में वैयक्तिक सहायक, कनिष्ठ सहायक पद पर कार्यरत हैं।
पंजीकरण से पहले पुलिस से सत्यापन कराने का प्रस्ताव भारतीय चिकित्सा परिषद ने पंजीकरण के लिए आवेदन करने डॉक्टरों का पुलिस से सत्यापन कराने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। जिससे भविष्य में पंजीकरण में फर्जीवाड़ा न हो सके।I