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Dehradun News: अधिकारियों ने कीं अनियमितताएं, भ्रष्टाचार साबित नहीं

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उद्यान घोटाले में तत्कालीन निदेशक डॉ. हरमिंदर बवेजा समेत तीन अधिकारियों व एक नर्सरी संचालक के खिलाफ दर्ज एक मुकदमे में सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट लगा दी।
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सीबीआई की जांच में अधिकारियों की कार्यप्रणाली में अनियमितताएं तो खूब हुई लेकिन भ्रष्टाचार के आरोप में साक्ष्य नहीं मिले। पौधे अधिक दामों पर खरीदे गए लेकिन इसके सापेक्ष अधिकारियों के रिश्वत लेने या अपने खातों में पैसा लेने के आरोप साबित नहीं हुए। स्पेशल सीबीआई जज मदन राम की कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट को मंजूर भी कर लिया है।
उद्यान विभाग का यह घोटाला दीपक करगेती ने उजागर करने का दावा किया था। आरोप थे कि वर्ष 2021 में उद्यान विभाग में कीवी, सेब, अखरोट आदि के पौधों की खरीद विभिन्न नर्सरियों से की गई थी। इनमें कीवी के सीडिंग प्लांट को 35 के स्थान पर 75 रुपये और ग्राफ्टेड प्लांट को 75 रुपये के स्थान पर 175 रुपये पर खरीदा गया।
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इसके साथ ही पौधों की फिर से खरीद हुई जिनमें एक बार फिर से बढ़े हुए दाम नर्सरियों को अदा किए गए। इनमें इस बार सीडिंग प्लांट जो कि पहले 75 में खरीदा गया उसे 225 और 175 वाले को 275 में खरीदा गया। आरोप था कि सरकारी योजनाओं के तहत खरीदे गए इन पौधों में अनुचित लाभ नर्सरियों को दिया गया। इसके बाद इस पैसे की अधिकारियों ने बंदरबांट की। इस मामले में सरकार ने भी जांच कराई लेकिन कोई आरोपपत्र दाखिल नहीं हो सका।
इसके बाद दीपक करगेती ने इस मामले को हाईकोर्ट में उठाया। हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने तत्कालीन उद्यान निदेशक डॉ. हरमिंदर बवेजा, मुख्य उद्यान अधिकारी मीनाक्षी जोशी, प्रभारी उद्यान सचल दल इंदु भूषण कुमोला और यूके हाईटेक नर्सरी के संचालक अनिल रावत के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। इन पर आरोप यह भी था कि डॉ. बवेजा ने नियमों का उल्लंघन करते हुए महज दो दिन के भीतर नर्सरी का लाइसेंस जारी किया। इसके अलावा कुछ पौधों की खरीद एक ऐसी नर्सरी से दिखाई गई जो मौके पर थी ही नहीं।
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