उत्तराखंड में लगातार पटरी से उतरती व्यवस्था के लिए अफसरों का एक ही जगह रहने का मोह भी बड़ा कारण है।
सरकार को करनी पड़ी खासी मशक्कत
कुमाऊं में पिछले दिनों सर्वाधिक घटनाएं हुई, जिनसे निपटने के लिए सरकार को खासी मशक्कत करनी पड़ी। लेकिन कुमाऊं कमिश्नरी के सबसे वरिष्ठ अफसर मंडलायुक्त होते हैं।
और, मौजूदा मंडलायुक्त अवनेंद्र सिंह नयाल पिछले सात आठ सालों से अलग-अलग पदों पर नैनीताल व आसपास के जिलों में ही तैनात रहे हैं। इसके अलावा धीराज सिंह गर्ब्याल जो इस समय मंडी निदेशक के साथ ही केएमवीएन के एमडी जैसा महत्वपूर्ण चार्ज संभाले है, की नौकरी भी सालों से कुमाऊं में ही है।
पीसीएस अफसर जगदीश कांडपाल पिछले छह सात सालों से कुमाऊं में ही है। वह डिप्टी कलक्टर की रैंक में होने के बावजूद अपर आयुक्त कुमाऊं बन गए है। इसके अलावा कुछ पुलिस अफसर आईपीएस अशोक भट्ट भी कई सालों से कुमाऊं में हैं।
पिछले दिनों उन्हें अल्मोड़ा से हटाकर पुलिस मुख्यालय भेजा, लेकिन उन्होंने अपना तबादला आईआरबी रामनगर में करा लिया। एडिशनल एसपी काशीपुर देवेंद्र सिंह पींचा तीन साल पहले कुछ दिनों के लिए पौड़ी जरूर आए लेकिन फिर कुमाऊं लौट गए।
अल्मोड़ा के एसपी केएस नगन्याल भी काफी लंबे समय से कुमाऊं में ही जमे है। ऐसे ही कुछ नाम गढ़वाल में भी है। देहरादून के एमएनए हरक सिंह रावत लंबे समय से देहरादून, हरिद्वार में ही जमे है।
हंसादत्त पांडे की भी ज्यादातर नौकरी गढ़वाल में ही रही। देहरादून की एडीएम झरना कमठान भी पिछले कई सालों से घूम फिरकर देहरादून में ही पोस्टिंग पाने में कामयाब हो जा रही है।