वित्तीय वर्ष के पहले दिन उत्तराखंड के आला अधिकारियों ने वित्तीय अनुशासन का पाठ पढ़ा। मुख्य सचिव एन रविशंकर ने दिन भर चली बैठक में सभी प्रमुख विभागों की समीक्षा की।
अधिकारियों को तिमाही योजना बनाने और हर माह प्रगति की समीक्षा करने का निर्देश दिया गया। मुख्य सचिव ने माना की बार-बार की हिदायत के बावजूद विभाग मार्च बुखार से पीड़ित रहे और 31 मार्च को क्लोजिंग के दिन भी वित्तीय स्वीकृतियों केलिए दौड़ धूप होती रही। इसी का परिणाम रहा कि कुछ विभागों का बजट भी लैप्स हुआ।
मुख्य सचिव ने चार धाम, अर्द्धकुंभ, नमामी गंगे, अवस्थापना, कृषि, वन, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि विभागों की समीक्षा की। प्रमुख सचिव वित्त राकेश शर्मा भी इस बैठक में शामिल रहे और उन्होंने कई विभागों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाया।
प्रमुख सचिव वित्त का कहना था कि रूल बुक, पूर्व के शासनादेश होने के बावजूद कई विभागों के अधिकारी इनकी तरफ देखना गवारा नहीं करते। कई स्वीकृतियों के लिए विभागों के अध्यक्षों और सचिवों को अधिकार है पर इसके बाद भी प्रस्ताव बनाकर वित्त को भेज दिया जाता है। इससे अनावयश्क आपत्तियां लगती है और समय बरबाद होता है।
बैठक में इस मामले में अधिकारियों के प्रशिक्षण तक का सुझाव दिया गया। कहा यह भी गया कि फाइलों को सेक्शन अधिकारियों के भरोसे छोड़ दिया जाता है। सचिव अपनी तरफ से मेहनत नहीं करते।
दूसरी ओर मुख्य सचिव एन रविशंकर ने मार्च में ही स्वीकृति कराने की परंपरा पर नाराजगी जताई। मुख्य सचिव ने कहा कि विभाग तिमाही योजनाओं पर काम करें और मासिक लक्ष्य निर्धारित करें। इस बार भी क्लोजिंग पर कई विभाग स्वीकृति के लिए दौड़ धूप करते रहे।