फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

महज 48 घंटे में खुल गई अफसरों की पोल

Tue, 15 Apr 2014 10:09 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
राजधानी देहरादून में अतिक्रमण हटाओ अभियान का सच केवल 48 घंटे में सामने आ गया।
विज्ञापन


हाईकोर्ट से कोर्ट कमिश्नर नियुक्त दून बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव शर्मा ने सोमवार को चकराता रोड का जायजा लिया तो कई जगह अतिक्रमण और अवैध कब्जे नजर आए।

पढ़ें, भारत के आगे झुक गया पाकिस्तान का 'शीश'

मौके पर लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से पूछा कि बैठक में उनका दावा था कि पूरा रास्ता अतिक्रमण मुक्त है, अब अतिक्रमण कहां से आ गया? इस पर अफसरों को जवाब देते नहीं बना।
विज्ञापन


कोर्ट कमिश्नर ने रोड की चौड़ाई कई जगह से नपवाई तो कहीं ज्यादा तो कहीं कम मिली। पूरे मार्ग में सरकारी और निजी दोनों तरह के कब्जे नजर आए।

पढ़ें, कांग्रेस को मिला एक और मजबूत हाथ का साथ

कई जगह फुटपाथ पर दुकानदारों ने सामान सजा रखा था तो कहीं दो मीटर का शेट बैक नहीं था।

निरीक्षण के दौरान बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष प्रेमचंद शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता आरएस राघव, सह सचिव भानु प्रताप सिसौदिया, विनय कुकसाल, सिटी मजिस्ट्रेट गिरीश गुणवंत, एई पीडब्ल्यूडी एलएस नेगी आदि मौजूद थे।

चकराता रोड, 11.30 बजे
कोर्ट कमिश्नर राजीव शर्मा चाट वाली गली के पास पहुंचे। उन्होंने जानना चाहा कि रोड के किनारे खाली जगह पर रेलिंग किसकी है। इसके बाद रेलिंग की लंबाई-चौड़ाई नपवाई।

स्थानीय निवासी सुभाष गुप्ता ने बताया कि यह शिव मंदिर की जगह है। खाला स्टोर के पास कुछ दुकानें पीडब्ल्यूडी पिलर से कुछ फीट बाहर निकली थी।

दोपहर 12:11 बजे
कोर्ट कमिश्नर ने पाया कि बिजली के कई पोल मार्ग में हैं। यूपीसीएल अफसरों के बारे में पूछने पर मालूम चला कि कोई है ही नहीं। फोन कर बुलाया गया तो एसडीओ चंद्र मोहन पहुंचे।

कोर्ट कमिश्नर ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सबसे ज्यादा अतिक्रमण बिजली के पोल से हो रहा है। इससे पब्लिक परेशान है।

दोपहर 12: 20 बजे
टिपटॉप बिजनेस सेंटर से रावत कलर लैब तक दुकानों में सेट बैक नहीं होने पर कोर्ट कमिश्नर ने इसकी वजह पूछी। उन्होंने विभिन्न विभागों के अफसरों को नक्शे और फाइलें लेकर बृहस्पतिवार की बैठक में पहुंचने के निर्देश दिए।

दोपहर 12: 35 बजे
चकराता मार्ग पर रोड नापी गई। पाया गया कि मार्ग में कुछ भवन अतिक्रमण की वजह बने हैं। कोर्ट कमिश्नर ने कहा कि वर्ष 2010 में यह अतिक्रमण क्यों नहीं हटाया गया?

पढ़ें, देहरादून पुलिस ने लिखी एक और 'खून' की कहानी

आगे बढ़ने पर एक महिला और कुछ लोग बाहर आकर प्रशासन की टीम से गाली-गलौज करने लगे। महिला का कहना था कि वे पहले ही सड़क में आ चुकी है। अब उसका मकान तोड़ा गया तो जान दे देगी।

दोपहर 1:20 बजे
प्रभात सिनेमा हाल के पास मार्ग कहीं कम तो कहीं अधिक चौड़ा था। यहां अलग-अलग जगह से मार्ग नापा गया।

सिनेमा हाल से आगे मिले कुछ व्यापारियों का कहना था कि चकराता रोड पर डिवाइडर घुमा दिया गया है। सुरेंद्र भाटिया बताते हैं कि डिवाइडर घुमाने से उनकी ओर की रोड की चौड़ाई घट गई है।
विज्ञापन


पढ़ें, जीत के लिए 'माओवादियों' की शरण में नेताजी

चकराता रोड पर कई जगहों पर अतिक्रमण मिला है। सरकारी और निजी दोनों तरह का अतिक्रमण है। हमारा मकसद व्यापारियों को परेशान करना नहीं है, लेकिन फुटपाथ पर कब्जे हैं, इससे हर कोई परेशान है। चकराता रोड का सबसे पहले निरीक्षण इसलिए किया गया, क्योंकि अफसरों का दावा था कि यहां अतिक्रमण नहीं है।
- राजीव शर्मा, कोर्ट कमिश्नर और अध्यक्ष, दून बार एसोसिएशन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें