अहम बात यह भी है कि शपथपत्र के साथ दाखिल पत्रों तथा टैक्स लगाने के आदेशों से साफ हो रहा है कि याचिकाकर्ता पर यह टैक्स जनहित याचिका के प्रतिवादी संख्या-12 ज्वाइंट कमिश्नर राज्यकर नवीन चंद्र जोशी (हरिद्वार में तैनात) ने ही यूपी के टैक्स अफसरों से पत्र व्यवहार करके लगवाया है। इसके लिए दोनों प्रदेशों के कमिश्नर कार्यालयों के बीच भी पत्र व्यवहार किया गया है।
कमिश्नर यूपी वाणिज्यकर की ओर से आयुक्त राज्यकर उत्तराखंड को 24 मई को भेजे पत्र में स्पष्ट लिखा है कि धर्मेंद्र सिंह का वर्ष 2014-15 एवं 2015-16 का कर निर्धारण आदेश कर दिया गया। वर्ष 2013-14 के कर निर्धारण के लिए कार्यवाही कर दी गई है। 2016-17 तथा 2017-18 के कर निर्धारण के लिए नोटिस जारी कर दिए गए हैं। पत्र के अनुसार मेरठ के अफसरों को धमेंद्र के पते पर उनकी फर्म नारायण टायर वर्क्स की कोई व्यावसायिक गतिविधि या स्टाक नहीं मिला। हाईकोर्ट में दाखिल याचिकाकर्ता की आय की सूचना के आधार पर ही टैक्स लगाया गया।
याचिका में इन्हें बनाया गया है प्रतिवादी
जनहित याचिका में उत्तराखंड सरकार द्वारा मुख्य सचिव, सचिव वित्त, सचिव राजस्व, अपर सचिव वित्त, चीफ कमिश्नर ट्रेड टैक्स, डायरेक्टर जनरल आयकर (जांच) लखनऊ और सीबीआई के डायरेक्टर जनरल के अतिरिक्त उत्तराखंड वाणिज्यकर के 39 अधिकारियों को उनके नाम से पक्षकार बनाया गया है। इसमें सचिव वित्त, अपर सचिव वित्त, स्पेशल कमिश्नर के वाणिज्यकर के एक एडिशनल कमिश्नर, दो ज्वाइंट कमिश्नर, छह डिप्टी कमिश्नर, 15 असिस्टेंट कमिश्नर और 12 व्यापार कर अधिकारियों के नाम शामिल हैं।