शराब के ठेकों पर होने वाली ओवर रेटिंग से बीते केवल एक साल में लगभग डेढ़ सौ करोड़ रुपए की अवैध वसूली का मोटा अनुमान है। यूपी से शुरू हुआ ओवर रेटिंग का यह खेल उत्तराखंड में बदस्तूर जारी है। शराब देशी हो या अंग्रेजी या फिर बीयर, हर बोतल पर कम से कम पंद्रह से बीस रुपए अधिक वसूला जाना आम बात है।
इस वसूली का विरोध करने पर ग्राहक को प्रिंट रेट बढ़ने की बात समझा दी जाती है। तमाम शिकायतों के बावजूद आबकारी अधिकारी आंख मूंदे रहे। अगर विभाग के आंकड़ों के हिसाब से इस अवैध वसूली का आंकड़ा देखा जाए तो यह बीते एक साल में लगभग डेढ़ सौ करोड़ से भी ज्यादा का बैठता है। नई सरकार में आबकारी मंत्री प्रकाश पंत ने मामले की जांच कर गंभीर कार्रवाई की बात कही है।
आबकारी विभाग के आंक़ड़ों पर गौर फरमाया जाए तो प्रदेश में प्रतिवर्ष लगभग तीस लाख पेटी अंग्रेजी शराब की बिक्री होती है। बोतलों में हिसाब लगाया जाए तो तीन करोड़ साठ लाख बोतल। इसी तरह से राज्य में 25 लाख पेटी बीयर की बिक्री होती है। बोतल के हिसाब से तीन लाख बोतल। देसी शराब की भी लगभग 3.33 करोड़ बोतल की बिक्री होती है।
अंग्रेजी शराब, बीयर और देसी शराब की प्रति बोतल पर अगर न्यूनतम 15 रुपये की ओवर चार्जिंग को जोड़ा जाए तो यह आंकड़ा लगभग डेढ़ अरब रुपये के आसपास बैठता है। यानि एक साल में डेढ़ अरब रुपये के वारे न्यारे। डेढ़ अरब की भारी भरकम रकम किसकी जेब में जाती है ? आबकारी विभाग के अधिकारियों ने शिकायत के बाद भी अभी तक कार्रवाई क्यों नहीं की? मामला संज्ञान में आने के बाद प्रदेश के आबकारी मंत्री प्रकाश पंत ने ओवर चार्जिंग पर जांच बैठा दी है। उन्होंने बताया कि पूरे मामले की जांच कराई जाए। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
अधिकारी अब बन रहे हैं दूध के धुले
आबकारी आयुक्त द्वारा बीयर की बोतल खरीदने में भी ओवर चार्जिंग के इस मामले के साथ यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि अभी तक आबकारी आयुक्त क्या कर रहे थे ? युगल किशोर पंत भी लगभग एक साल से आबकारी आयुक्त के पद पर तैनात हैं। वह भी इस मामले की जांच करने तब निकले, जब प्रदेश का निजाम बदल चुका है। ओवरचार्जिंग की शिकायत कोई आज तो आई नहीं। जिस आबकारी अधिकारी को बुलाकर आयुक्त ने सोमवार को ठेके पर ओवरचार्जिंग पर जुर्माना करवाया, उनके खिलाफ क्यों कार्रवाई नहीं की ? आबकारी अधिकारी और उनकी टीम का आखिर क्या काम है ?
आबकारी विभाग में ही लोग यह कहते पाए गए कि ओवर चार्जिंग के मामले में सिर्फ ठेके पर जुर्माना लगाने की कार्रवाई करना प्रदेश की नई सरकार की आंख में धूल झोंकने की कोशिश भर है। आबकारी विभाग में हर निरीक्षक का क्षेत्र बंटा होता। क्षेत्र के ठेकों पर होने वाली ओवर चार्जिंग की जिम्मेदारी उनकी बनती है। पूरे जिले की जिम्मेदारी जिला आबकारी अधिकारी पर। पहले भी कई ओवर चार्जिंग की शिकायत मिलने पर अधिकारियों ने मामले को रफादफा कर दिया। उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट दे दी कि शिकायत का कोई प्रमाण नहीं मिला। अब जबकि आबकारी आयुक्त से ही एक ठेके पर ओवर चार्जिंग हो गई तो हकीकत सबके सामने है। अब कोई इंकार नहीं कर सकता है कि ठेकों पर ओवर चार्जिंग नहीं हो रही है।
ओवर चार्जिंग रोकने को लेकर क्या उपाय
-पहली बार ओवर चार्जिंग की शिकायत मिलने पर पांच हजार रुपये का जुर्माना।
-दूसरी बार शिकायत मिलने पर लाइसेंस फीस का एक फीसदी का जुर्माना।
-इसके बाद हर बार मिलने वाली शिकायत पर जुर्माना की राशि एक-एक फीसदी तक बढ़ती जाएगी।