पिछले दिनों एक अजीबोगरीब वाकया पेश आया। दिल्ली जाने की तैयारी में वजीर-ए-आला का दरबार लगा था। राज्य में आई मुसीबतों के मद्देनजर दिल्ली दरबार में चर्चा करने के लिए कागज पत्तर समेटे जा रहे थे।
इसी बीच वजीर-ए-आला का एक खास दरबारी दौड़कर आया और बोला जहांपनाह आपके दिल्ली जाने का इंतजाम हो गया है। खास तौर तरीकों वाला चौपर मंगा दिया है। चूंकि अपनी सल्तनत में तो इतनी ऐशोआराम वाला विमान नहीं है इसलिए आपकी खातिर खास इंतजाम किया गया है।
फटकार लगाना मजबूरी हो गया
दरबार में उस वक्त और भी दरबारी थे इसलिए वजीर-ए-आला को फटकार लगाना मजबूरी हो गया। हर अफसर पर रौब गालिब करने वाले इस खास दरबारी को निजाम ने ऐसा फटकारा कि सब देखते रह गए। बादशाह सलामत बोले कि इस खास इंतजाम वाले चौपर में तुम ही दिल्ली आओ, मैं तो आम रियाया वाली फ्लाइट से जा रहा हूं।
बस फिर क्या था, बादशाह हुजूर उठे और अपने एक घरेलू नवरत्न को साथ लेकर दिल्ली रवाना हो गए। लेकिन खास दरबारी को फटकार लगाने की चर्चा दिन भर रही।
शताब्दी से रिजर्वेशन कराया
हमेशा हवा में सैर करने वाले इस दरबारी के सामने भी अब परेशानी खड़ी हो गई। जब बादशाह सलामत ही साधारण फ्लाइट से गए हैं तो फिर वह कैसे चौपर से दिल्ली जाए। भले ही वह कई कई दिन तक चौपर अपने कब्जे में लिए घूमते रहे, मगर यह वक्त मुफीद नहीं था। इसलिए शाम को तमाम मुनीमों को लगाकर शताब्दी से रिजर्वेशन कराया और तब जाकर अगले दिन दिल्ली दरबार पहुंचे।