दैवी आपदा के बाद सरकार ने आलू व सेब की खुद खरीद करने की घोषणा कर उत्पादकों की तरफ दो कदम बढ़ाए हैं। इस फैसले से प्रदेश के लगभग चालीस हजार किसानों को फायदा होगा। सरकार का यह फैसला उन्हीं क्षेत्रों में लागू होगा जहां पर सड़कें टूटने से फसल का उठान खेतों से नहीं हो रहा है।
फल-सब्जी बाजार तक नहीं पहुंच रहे
दैवी आपदा में रास्ते टूटने के कारण किसानों के फल सब्जी खेत से बाजार तक नहीं पहुंच रहे हैं। इसका असर फल व सब्जी मंडियों में बढ़ते दाम आम आदमी के लिए मुसीबत बने हैं। इसलिए सरकार ने सेब व आलू सीधे किसानों से खरीदने का निर्णय लिया है। इसके लिए जल्द ही न्यूनतम समर्थन मूल्य भी घोषित होगा।
प्रमुख सचिव उद्यान ओमप्रकाश ने बताया कि सेब उत्पादन का कुल रकबे का एक तिहाई क्षेत्र व आलू का एक चौथाई क्षेत्र ऐसा हैं जहां से रास्ते कटने के कारण उठान नहीं हो रहा है। कुल मिलाकर सेब का लगभग ग्यारह हजार हेक्टेयर व आलू का बारह हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल ऐसा है जहां से फसल खरीदने की जरूरत रहेगी। वैसे भी कुल मिलाकर पांच जिले सर्वाधिक प्रभावित है। इन्हीं जिलों के रास्ते भी कट गए है।
सेब की फसल (आंकड़े लगभग में)
कुल क्षेत्रफल - 33000 हेक्टेयर
कुल उत्पादक - 38000 हजार
कुल उत्पादन - 1.35 लाख टन
आलू की फसल
कुल क्षेत्रफल - 35000 हेक्टेयर
कुल उत्पादक - 50000 से ज्यादा
कुल उत्पादन - 4 लाख टन
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