उत्तराखंड में गांवों के विकास से संबंधित विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को अब गांवों की वास्तविक तस्वीर को भी सामने रखना होगा।
हर विकास खंड के दस सबसे पिछड़े गांवों में इनको रात बितानी होगी। इसके साथ ही गांवों की एक विस्तृत रिपोर्ट भी देनी होगी। अधिकारियों और कर्मचारियों की इस विस्तृत आख्या के जरिए शासन गांवों के पिछड़ेपन को दूर करने के उपाय खोजने की कोशिश में भी है। मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने इस संदर्भ में आदेश जारी किए हैं।
पूर्व में सचिवालय में तैनात अधिकारियों को गांवों में रात बिताने का आदेश भी शासन ने जारी किया था। इसमें कई अफसरों ने गांवों में रात भी बिताई और अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपी भी। अब गांवों की ओर रुख करने की इस योजना में शासन ने थोड़ा सा बदलाव किया है।
अब जिला स्तर पर गांवों के विकास से संबंधित विभागों के अधिकारियों को गांवों में रात बिताने का आदेश दिया गया है। इनसे कहा गया है कि हर विकासखंड के दस सबसे पिछड़े गांवों का भ्रमण कर शासन को रिपोर्ट दी जाए। गांवों के चयन के मानक भी तय कर दिए गए हैं।
गांव की मुख्यालय से दूरी, स्कूल, अस्पताल और अन्य सुविधाओं के आधार पर तय किया जाएगा कि गांव कितना पिछड़ा हुआ है। पिछड़े हुए गांवों की सूची तैयार होने के बाद अधिकारियों को कहा गया है कि गांवों का दौरा कर देखें कि ग्राम विकास की योजनाओं की वास्तविक स्थिति क्या है।
मुख्यमंत्री के वित्त सलाहकार इंदु कुमार पांडे के मुताबिक उच्च अधिकारियों की बजाए निचले स्तर के अधिकारी गांवों की ओर रुख करना ज्यादा फायदेमंद रहेगा। शासन को मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर गांवों के पिछड़ेपन की वजह खोजने की कोशिश भी की जाएगी। अधिकारियों को विस्तृत रिपोर्ट के अलावा गांवों में संचालित योजनाओं का पूरा ब्यौरा भी देना होगा।