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निकाय चुनाव आरक्षण पर आपत्ति : किसी को ओबीसी नहीं भा रहा तो किसी को सामान्य सीट से दिक्कत

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Iडीएम की अध्यक्षता में जिले के निकायों में आरक्षण पर हुई सुनवाई
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Iसबसे ज्यादा आपत्तियां नगर निगम देहरादून से पहुंचीI
Iनिकाय चुनाव के तहत वार्डों में आरक्षित की गई सीटों पर आई आपत्तियों पर रविवार को अधिकारियों ने सुनवाई की। देहरादून और ऋषिकेश नगर निगम सहित देहरादून की सभी सातों निकायों के लिए सुनवाई हुई। इस दौरान किसी ने ओबीसी के लिए आरक्षित सीट पर दिक्कत जाहिर की तो कोई पिछले कई साल से महिला सीट किए जाने पर अपनी पीड़ा लेकर पहुंचा था। सबसे ज्यादा आपत्तियां देहरादून नगर निगम से आईं। विकासनगर और डोईवाला से भी आपत्तियां लगाई गई थीं, लेकिन मौके पर कोई नहीं पहुंचा। ऋषिकेश से 18 आपत्तियां दर्ज कराई गईं थीं। छह लोगों ने जिला मुख्यालय पहुंचकर प्रशासन को अपनी आपत्तियों से अवगत कराया। अधिकारियों ने उनका पक्ष गंभीरता से सुना और आरक्षण का नियम समझाया। इसके अलावा डोईवाला से दो आपत्तियां लगाई गईं थीं, लेकिन सुनवाई के दौरान कोई नहीं आया। उधर, विकासनगर से दो आपत्तियां लगाई गई थीं, लेकिन सुनवाई के दौरान कोई नहीं पहुंचा।I
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Iदेहरादून नगर निगम से करीब 253 से ज्यादा आपत्तियां पहुंची
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Iजिले के सबसे बड़े नगर निगम देहरादून के 100 वार्डों से 253 आपत्तियां पहुंची। नगर निगम की ओर से मौके पर पहुंचे अपर नगर आयुक्त बीर सिंह बुदियाल ने आपत्तियाें पर जवाब दिए। सबसे बड़ी आपत्ति वार्ड-86 के दयाराम ने लगाई। उनका कहना था कि उनके वार्ड में बालावाला में एसटी की जनसंख्या को नकरौंदा में बांट दिया। इससे उनके वार्ड की एसटी की जनसंख्या बदल गई। उनका कहना था कि पिछली बार भी उनके यहां इस तरह की दिक्कत आई थी, जिसको सुधारा गया था। इसके अलाव वार्ड मालसी के अनुराग ने कहा कि उनका वार्ड पहले भी अनारक्षित था और नए हिसाब से भी उनको अनारक्षित किया गया, जबकि उनके वार्ड में 11.23 प्रतिशत एससी वोट है। इसी तरह वार्ड दो विजयपुर से, वार्ड-14 आदि जगहों से आपत्तियां पहुंची। प्रशासन ने आपत्तियों पर सुनवाई की।
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Iहरबर्टपुर में लगाई गई नौ आपत्तियां, पांच लोग पहुंचेI
Iनगर पंचायत हरबर्टपुर के वार्डों के लिए नौ आपत्तियां लगाई गई थी, इन आपत्तियों पर अपना पक्ष रखने के लिए मौके पर पांच लोग पहुंचे। इनमें ओबीसी, अनारक्षित सहित कई सीटों को नाराजगी जाहिर की गई। हरबर्टपुर के अधिशासी अधिकारी ने आपत्तियाें पर अपना जवाब दिया।I
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Iमसूरी से आई 11 आपत्तियां
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Iनगर पालिका मसूरी से 11 लोगों ने आपत्तियां लगाई थी। रविवार को आपत्तियों की सुनवाई के दौरान चार लोग कलेक्ट्रेट सभागार में पहुंचे। मसूरी के महिमानंद ने कहा कि वार्ड-संख्या अब तक 1998 और 2003 में एससी, फिर 2008 में एससी महिला और उसके बाद 2013 में दोबारा फिर एससी के लिए आरक्षित कर दी गई। 2018 में फिर यह सीट एससी महिला को दे दी गई थी। अब फिर यह एससी महिला के लिए आरक्षित कर दी गई। उन्होंने कहा कि चक्रानुसार नियम यहां लागू नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि यह सीट सामान्य की जाए।
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Iऋषिकेेश : पूर्व की तरह ही आरक्षण रखने पर जताई आपत्तिI
Iआपत्तिकर्ता चंद्रेश यादव ने कहा कि नगर निगम ऋषिकेश में वार्ड संख्या-1 को महिला के लिए आरक्षित किया गया है। जबकि वर्ष 2018 में भी यह वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित था। रोटेशन के आधार पर वार्ड को फिर से महिला के लिए आरक्षित किया जाना न्यायोचित नहीं है। शासन की ओर से नई आरक्षण नियमावली जारी की गई है लेकिन नगर निगम के 60 वार्डों में पूर्व की तरह ही आरक्षण रखा गया है। जबकि आरक्षण नियमावली के तहत 40 वार्डों का पुनर्मूल्यांकन कर आरक्षण निर्धारित किया जाना था। उन्होंने सभी वर्गों का ध्यान रखते हुए वर्तमान आरक्षण में परिवर्तन की मांग की।I
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Iसेलाकुई : कुल 25 आपत्तियां आईंI
Iसेलाकुई से कुल 25 आपत्तियां आईं। दो लोगों ने जिला मुख्यालय पहुंचकर सुनवाई में हिस्सा लिया। अनीस अहमद ने कहा कि नगर पंचायत सेलाकुई के वार्ड संख्या-3 को ओबीसी महिला के लिए आरक्षित किया गया है। जबकि वार्ड में ओबीसी की आबादी नाम मात्र की है। वहीं नगर पंचायत के वार्ड संख्या-5 ओबीसी पुरुष के लिए आरक्षित है। ऐसे में वार्ड संख्या-5 को ही ओबीसी महिला पद के लिए आरक्षित किया जाए। वहीं अरविंद शाह ने कहा कि नगर पंचायत के वार्ड संख्या-4 को ओबीसी महिला के लिए आरक्षित करने के लिए पर्याप्त आंकड़े हैं। पूर्व में यह सीट एससी के लिए आरक्षित रहे चुकी है। वहीं कुछ लोग साजिश के तहत बायांखाला की एससी महिला सीट को वार्ड संख्या-4 ओबीसी महिला सीट बनाने का प्रयास कर रहे हैं। जबकि इस सीट पर पहले ही एससी को प्रतिनिधित्व मिल चुका है। ऐसे में वार्ड-4 को ओबीसी महिला के लिए आरक्षित रहने दिया जाए।I
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