फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Dehradun News: केरल के राज्यपाल बोले- धर्म, जाति, रंग से नहीं, आत्मा से परिभाषित होती है भारत की संस्कृति

विज्ञापन
विज्ञापन
Iदो दिवसीय व्याख्यान माला गंगधारा कार्यक्रम का हुआ समापन
विज्ञापन

I

Iभारत की संस्कृति किसी धर्म, जाति, रंग या समाज से नहीं, बल्कि आत्मा से परिभाषित होती है। हमारी आत्मा किसी भी तरीके से किसी दूसरे व्यक्ति, यहां तक कि किसी जीव जंतु को भी पीड़ा पहुंचाने की इजाजत नहीं देती और यही हमारी संस्कृति है। ये बातें दो दिवसीय व्याख्यान माला गंगधारा कार्यक्रम के समापन पर केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने बतौर मुख्य वक्ता कहीं।I
Iदून विश्वविद्यालय के सभागार में संस्कृति, प्रगति और प्रकृति पर आधारित कार्यक्रम में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। उन्होंने कहा, सोच-विचार और धारणा ही जिंदगी है। हमारी संस्कृति, सभ्यता और वेद पुराण में सब लिखा है और अब समय आ गया है हमें अपनी जड़ों से जुड़ने का। पूरे राष्ट्र ने सपना देख लिया है कि 2047 में भारत विकसित राष्ट्र बनेगा और हम दूसरों पर निर्भर नहीं रहेंगे। हमें विश्वगुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता। राज्यपाल ने कहा, उत्तराखंड को प्रकृति ने योग, पर्यटन और आयुर्वेद का वरदान दिया है। हमें इसे अपनी आर्थिकी में बदलना होगा।
विज्ञापन

I
Iउन्होंने कहा, उत्तराखंड की महिलाएं व बेटियां पूरी दुनिया से अलग हैं। जबकि, युवा स्वरोजगार और स्टार्टअप को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं। नशा और भ्रष्टाचार पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा, यह दोनों ही हमारे परिवार और सभ्यता को नष्ट कर देते हैं। इसके खात्मे के लिए भी हमें एक होना होगा। वहीं, इससे पहले कार्यक्रम के तहत विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।I
I
I
Iसंस्कृत के श्लोक से जीवन का पाठ पढ़ा गए केरल के राज्यपाल
I
Iकेरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने संस्कृत के कई श्लोक और महाभारत के प्रसंगों के माध्यम से जीवन का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा, स्वामी विवेकानंद ने कहा है कि हमारे जीवन का उद्देश्य सिर्फ ज्ञान की प्राप्ति है और ज्ञान का मकसद अपने अंदर की कला को विकसित कर एकता को देखने की क्षमता को विकसित करता है। उन्होंने कहा, इंद्रियों पर नियंत्रण, दान करना और करुणा हमें श्रेष्ठ जीवन जीने का तरीका सिखाते हैं। अपनी रोटी दूसरों के साथ साझा करके खाना, यही हमारी संस्कृति है।
विज्ञापन

I
I
I
Iबड़े युद्ध की कगार पर खड़ा है विश्वI
Iराज्यपाल आरिफ मो. खान ने चिंता जताते हुए कहा, आज दुनिया को देखकर ऐसा लगाता है कि पूरा विश्व बड़े युद्ध की कगार पर खड़ा है। दुनिया में तनाव है और एक-दूसरे के लिए नफरत है, लेकिन इसी बीच भारत पूरी दुनिया को एक संदेश देगा कि मानव शरीर परमेश्वर का मंदिर है और हम परमेश्वर को पीड़ा नहीं पहुंचाते, यही हमारी संस्कृति है। संस्कृति के मूल्य और आदर्श हमें दूसरों से अलग करते हैं। कहा, भारत ग्रंथों का देश है और हमारी कल्पना ज्ञान की प्राप्ति में लगे रहना है। यही वजह है कि अब दूसरे देशों के लोग अपनी संस्कृति को समझने के लिए भारत आ रहे हैं। भारत की संस्कृति अपने ज्ञान और प्रज्ञा के संवर्धन के लिए जानी जाती है और इसी के दम पर हमारी संस्कृति दुनिया के पांच देशों की सबसे उच्च संस्कृति में शामिल है।I
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें