प्राइवेट कॉलेजों की 50 प्रतिशत एमबीबीएस सीट पर राज्य शुल्क
नेशनल मेडिकल कमीशन ने पिछले दिनों एक आदेश जारी किया था, जिसके तहत प्राइवेट मेडिकल कॉलेज, यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की 50 प्रतिशत राज्य कोटे की सीटों पर भी राज्य सरकार को ही शुल्क लेना होगा। अभी तक यह कॉलेज महंगे शुल्क पर राज्य कोटे की सीटों पर दाखिला देते आए हैं। इस आदेश का प्रस्ताव चिकित्सा शिक्षा विभाग ने प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति को भेज दिया है।
पहले तीन साल का शुल्क स्थायी, तब नया शुल्क तय होगा
प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति के अध्यक्ष की कुर्सी 2019 से खाली थी। फरवरी 2022 में नए अध्यक्ष ने ज्वाइन किया है। सभी प्राइवेट कॉलेजों में विभिन्न कोर्स में अंतरिम शुल्क के आधार पर तीन साल तक प्रवेश दिए गए थे। अब समिति में इस शुल्क को स्थायी करने की प्रक्रिया चला रही है। इसके तहत शुल्क कम भी हो सकता है और मामूली बढ़ोतरी भी संभव है। वहीं, एमबीबीएस, एमडी-एमएस, नर्सिंग-पैरामेडिकल, तकनीकी कोर्सेज का नए सत्र का शुल्क इसके बाद तय किया जाएगा। इसके लिए 14 सितंबर को प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति की बैठक बुलाई गई है।
पुराने तीन साल का शुल्क कॉलेजों का तय नहीं था। जिस अंतरिम शुल्क पर दाखिले हुए थे, उसे स्थायी करने पर काम चल रहा है। इसके बाद नए सत्र के लिए शुल्क तय किया जाएगा। 14 सितंबर को बैठक होगी, जल्द ही बेहतर फैसले होंगे। -डॉ. रचना नौटियाल, नोडल अधिकारी, प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति