गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेंद्र कुमार ने कहा कि अंग्रेजी की अपेक्षा हिंदी बोलने में हमारे मन में हीन भावना नहीं आनी चाहिए। हमें गर्व के साथ हिंदी भाषा का प्रयोग करना चाहिए। तभी हम अपनी मातृभाषा और राजभाषा हिंदी का विकास और उसकी रक्षा कर सकते हैं।
विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में हिंदी दिवस पर हिंदी की दशा और दिशा विषय पर आयोजित गोष्ठी में मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. सुरेंद्र कुमार ने बताया कि दो सालों में गूगल पर हिंदी का प्रयोग करने वालों की संख्या में 80 फीसदी वृद्धि हुई है।
कुलपति ने बीए, एमए हिंदी और पीजी डिप्लोमा पत्रकारिता के छात्रों को हिंदी में हस्ताक्षर करने सहित अधिकाधिक मात्रा में हिंदी का प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया। विशिष्ठ अतिथि मानविकी संकाय के डीन प्रो. श्रवण शर्मा ने कहा कि हिंदी के विकास के लिए युवाओं को आगे आना होगा।
विभाग के प्रो. संत कुमार, प्रो. संतराम वैश्य ने हिंदी के महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम संयोजक हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. भगवानदेव पांडे ने अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए डा. अजीत तोमर ने बताया कि गुरुकुल कांगड़ी देश का पहला ऐसा विवि है जहां पर बीएससी के पाठ्यक्रम हिंदी में पढ़ाया जाना शुरू किया गया था । इस असवर पर मुकेश त्रिपाठी, परितोष प्रियदर्शी पाठक, रामबाबू यादव, विनय प्रताप सिंह, सुधीर कुमार, सत्येंद्र सिंह आदि मौजूद थे।
वहीं दूसरी ओर विवि के प्रबंध अध्ययन संकाय में हिंदी दिवस के अवसर पर यूजीसी के आदेशानुसार एमबीए एवं बीबीए के विषयों को हिंदी माध्यम से छात्रों को पढ़ाया गया। कुलपति प्रो. सुरेंद्र कुमार ने कहा कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय का भाषा विभाग हिंदी पर काफी जोर दे रहा है। हिंदी भाषा में छात्र विज्ञान के विषयों को पढ़ें, जिससे हिंदी के प्रति उनका प्रेम और बढ़ सके।
कुलसचिव प्रो. विनोद कुमार ने कहा कि हिंदी हमारे भावों को निखारने का काम करती है। प्रबन्ध अध्ययन संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो. पंकज मदान ने कहा कि यूजीसी ने यह निर्णय लिया गया कि प्रबंधन के विषयों को अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी में भी पढ़ाया जाए। इस अवसर पर डा. वागेश पालीवाल, डा. राजुल भारद्वाज, डा. अनिल डंगवाल, संचित डागर, विवेक अग्रवाल, दुर्गेश त्यागी, वैभव बत्रा, आशीष आर्य इत्यादि उपस्थित थे।