देहरादून। उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को बांटे गए कर्ज की अदायगी का स्तर बेहतर बना हुआ है। 2025-26 तक इन समूहों को बांटे गए कर्ज में एनपीए का प्रतिशत दो फीसदी से भी कम यानी 1.90 फीसदी के करीब है। आर्थिक जानकार मानते हैं कि छोटे वित्तीय समूहों की कर्ज अदायगी की बेहतर क्षमता उनके शानदार वित्तीय कौशल को दिखाती है। इससे इस बात का भी संकेत मिलता है कि यदि महिला समूहों को बड़ी बजटीय सहायता उपलब्ध कराई जाए तो वे बेहतर रिटर्न देने की क्षमता रखती हैं।
राज्य सरकार के अनुसार, मिशन के अंतर्गत अब तक 58,929 स्वयं सहायता समूहों को रिवॉल्विंग फंड से जोड़ा जा चुका है। महिलाओं के 47,228 समूहों को सामुदायिक निवेश निधि उपलब्ध कराई गई है। इससे महिलाओं की आंतरिक ऋण क्षमता बढ़ी है और वे आगे बढ़कर अपने समूहों में कर्ज ले रही हैं और उद्यम कर अपना विकास कर रही हैं।
विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अब तक 52,385 स्वयं सहायता समूहों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ते हुए इन्हें लगभग 48427 लाख रुपये का संचयी ऋण पोर्टफोलियो विकसित किया गया है। अकेले वित्त वर्ष 2025-26 में 30,762 स्वयं सहायता समूहों को 49610 लाख रुपये का ऋण दिया गया है।
समय से कर्ज वापसी ने बढ़ाई क्षमता
इन आंकड़ों को देखते हुए आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह वित्तीय प्रबंधन अपने व्यवसाय के प्रति महिलाओं की गंभीरता को दिखाती है। समूहों ने अपने व्यवसाय को बेहतर बनाते हुए लाभ कमाया और कर्ज वापसी की। इससे उनकी प्रबंधकीय क्षमता सामने आई है।