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Uttarakhand: अब श्रमिकों से दस घंटे ही करा सकेंगे काम, न्यूनतम मजदूरी में बच्चों की शिक्षा खर्च का भी प्रावधान

Fri, 20 Mar 2026 07:42 AM IST
Renu Saklani आफताब अजमत, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

अब श्रमिकों से दस घंटे ही काम कराया जाएगा। न्यूनतम मजदूरी में बच्चों की शिक्षा खर्च का भी प्रावधान  किया गया है। श्रम विभाग ने मजदूरी संहिता नियमावली 2026 का मसौदा जारी कर सुझाव मांगे गए हैं।

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मजदूर - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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उत्तराखंड में आने वाले समय में श्रमिकों से केवल 10 घंटे तक ही काम ले सकेंगे। इसके बाद ओवर टाइम का पैसा अलग से देना होगा। वहीं, पहली बार न्यूनतम मजदूरी दर का वैज्ञानिक फार्मूला तय करने के साथ ही सरकार ने श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य का खर्च भी इसमें जोड़ने का फैसला लिया है। इसके लिए श्रम विभाग ने उत्तराखंड मजदूरी संहिता नियमावली 2026 का मसौदा जारी करते हुए एक माह के भीतर सुझाव मांगे हैं।

नए नियमों के तहत कार्यस्थल पर काम के घंटों से लेकर न्यूनतम मजदूरी तय करने के मानकों में बड़े बदलाव किए गए हैं। किसी भी श्रमिक को एक दिन में 10 घंटे और सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम करने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। साथ ही, लगातार छह घंटे काम करने के बाद कम से कम आधे घंटे का विश्राम देना अनिवार्य होगा।

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यदि कोई श्रमिक अतिरिक्त समय (ओवरटाइम) काम करता है तो उसे सामान्य मजदूरी से दोगुनी दर पर भुगतान करना होगा। सरकार ने इस नियमावली पर आम जनता से सुझाव मांगे हैं। यदि किसी को इन नियमों पर आपत्ति है तो वे अधिसूचना जारी होने के 30 दिनों के भीतर सचिव, श्रम विभाग या श्रम आयुक्त को ई-मेल secretaryswpl25@gmail.com, lcukhld@gmail.com के माध्यम से अपनी राय भेज सकते हैं।

न्यूनतम मजदूरी के ये मानक होंगे

अब न्यूनतम मजदूरी केवल अनुमान पर नहीं, बल्कि वैज्ञानिक मानकों पर तय होगी। इसके तहत प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 2700 कैलोरी की खपत, प्रति परिवार सालान 66 मीटर कपड़ा, भोजन और कपड़े पर होने वाले कुल खर्च का 10 प्रतिशत आवास किराया माना जाएगा। इसके अलावा श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा और मनोरंजन के लिए कुल मजदूरी का 25 प्रतिशत हिस्सा अलग से जोड़ा जाएगा।

महिला श्रमिक के सास-ससुर भी परिवार

नई नियमावली में परिवार का दायरा बढ़ाते हुए इसे स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। इसमें पति-पत्नी, 21 वर्ष तक के आश्रित बेटे, अविवाहित पुत्रियां, शारीरिक या मानसिक रूप से अक्षम संतान और आश्रित माता-पिता (महिला कर्मचारी के मामले में सास-ससुर भी शामिल) को शामिल किया गया है। इसका लाभ ये होगा कि श्रमिकों संबंधी योजनाओं का लाभ इस पूरे परिवार तक पहुंच सकेगा।

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अब अत्यधिक कुशल श्रमिक भी होंगे

कौशल के आधार पर अभी तक श्रमिकों की तीन श्रेणियां अकुशल, अर्द्धकुशल और कुशल होती थीं। श्रम विभाग ने अब इसमें चौथी अत्यधिक कुशल श्रेणी भी जोड़ दी है। जो श्रमिक विशिष्ट उत्कृष्टता और निर्णय लेने की क्षमता रखेंगे, उन्हें इस चौथी श्रेणी में माना जाएगा। इसी हिसाब से उन्हें मानदेय, मजदूरी या अन्य लाभ मिलेंगे।

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