भूगर्भ जल दोहन रोकने के लिए अलग से प्राधिकरण को मंजूरी देने से कुछ राहत मिलती दिख रही है। उम्मीद है कि अब अवैध रूप से पानी के हो रहे दोहन पर रोक लग सकेगी। भूगर्भ जल दोहन करने वालों को अब कानून का पालन करना होगा।
इसकी परिधि में नदी, गदेरे, जल स्त्रोत, नलकूप सभी आएंगे। वाणिज्यिक उद्देश्य के लिए दोहन किए जाने वाले पानी से पहले अथॉरिटी से परमिट लेना होगा, हालांकि हैंडपंप इस कानून के दायरे में नहीं रहेंगे।
अथॉरिटी ही यह चिन्हित करेगी कि कहां पानी है, कहां दोहन किया जा सकता है और कहां नहीं। पानी लेने वालों के लिए उस जगह रिसोर्स को आर्टिफिशियल रिचार्ज करने का भी प्रावधान भी रखा गया है।
बागवानी, सिंचाई को भी इससे बाहर रखा गया है। ड्रिलिंग एजेंसी को अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसमें रेन वाटर हार्वेस्टिंग का भी प्राविधान है। राज्य सरकार की ओर से एक अपीलीय अथॉरिटी भी बनाई जाएगी जो कि इस अथॉरिटी के निर्णयों की सुनवाई करेगी।
एक्ट तैयार कर शासन भेज दिया गया था। इसे शुक्रवार को कैबिनेट ने सहमति दे दी है। यह अच्छी बात है। इससे पानी के अवैध रूप से हो रहे दोहन पर रोक लग सकेगी। एसके गुप्ता, मुख्य महाप्रबंधक, जल संस्थान