दरअसल सरकार को हाईकोर्ट के सख्त रुख के कारण अपने हाथ बांधने के लिए विवश होना पड़ रहा है। सुरेंद्र सिंह नेगी की याचिका पर 19 जून 2018 के आदेश में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सरकार को कहा था कि सरकारी जमीन पर राज्य के प्रत्येक नागरिक का हक है। सरकार अपनी मर्जी से बिना सार्वजनिक सूचना के सरकारी जमीन का आवंटन नहीं कर सकती।
न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने सरकार को आदेश दिया था कि सरकारी जमीन किसी भी व्यक्ति को बिना प्रक्रिया का पालन करे न दी जाए। हाईकोर्ट के इस आदेश के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ, चंडीगढ़ एवं अन्य बनाम नीरज शर्मा के मामले में यह स्पष्ट किया था कि शैक्षणिक संस्थाओं तक को सरकारी संपत्ति प्रीमियम आधार पर उपलब्ध नहीं कराई जा सकती।
सरकारी भूमि आवंटन के लिए नीति बनाई जा रही है। अभी मैं इस बारे में कुछ कहने की स्थिति में नहीं हूं। यह तय होना अभी बाकी है कि इसे कैबिनेट में लाया जाएगा या इसका शासनादेश किया जाएगा।
- सुशील कुमार, सचिव राजस्व
नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें... https://www.facebook.com/AuNewsDehradun/