अभिमन्यु एकेडमी के मालिक की कोठी में हुई डकैती के मामले में पुलिस ने लुटेरों की गिरफ्तारी को लेकर कोई कहानी नहीं बनाई। पूरा आपरेशन पुलिस अधीक्षक नगर श्वेता चौबे की अगुवाई में प्रोफेशनल तरीके से अंजाम दिया गया। जिस लुटेरे को जहां से दबोचा, वहीं के थाने में गिरफ्तारी भी दिखाई गई। संबंधित थाने में लिखापढ़ी करने के बाद बदमाशों को निर्धारित अवधि में कोर्ट में पेश भी किया, ताकि लुटेरों को सुनवाई के दौरान पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाने का कोई मौका ना मिल सके।
मामले की विवेचना में शुरू से ही वैज्ञानिक और आधुनिक तौर-तरीकों को इस्तेमाल किया गया। सर्विलांस का हथकंडा तो इस बार पुलिस के काम नहीं आया, लेकिन सीसीटीवी कैमरे सफलता की कुंजी साबित हुए। पुलिस ने दून से लेकर गाजियाबाद तक के टोल प्लाजा और प्राइवेट कैमरों की मदद से इस गुत्थी को सुलझाया। पुलिस को कार के नंबर तक पहुंचने के लिए एक माह पुराने रिकार्ड को खंगालना पड़ा। आरोपियाें के खिलाफ साक्ष्य जुटाने के बाद एसपी सिटी श्वेता चौबे ने दिल्ली पहुंचकर पूरे आपरेशन की कमान संभाल ली। दो दिन चले आपरेशन में एक-एक कर चार बदमाशों की गिरफ्तारी के साथ लाखाें की बरामदगी भी हुई है। बड़ी बात यह है कि लुटेरों की गिरफ्तारी को लेकर किसी तरह की कहानी बनाने से पुलिस ने परहेज किया। कार के नंबर के आधार पर अदनान तक पहुंची पुलिस ने सीधी कार्रवाई के बजाय उसे दिल्ली के थाना सदर बाजार पुलिस की मदद से पकड़ा।
पूछताछ में अदनान से सच उगला तो पुलिस ने सदर बाजार थाने में उसकी गिरफ्तारी दर्शा दी। ऐसे ही बीएसएफ के बर्खास्त डिप्टी कमांडेंट वीरेन्द्र ठाकुर की गिरफ्तारी में हुआ। पहाड़गंज थाने में उसकी गिरफ्तारी दर्ज कराई गई। लोकल मुखबिर मुजिब्बुर रहमान उर्फ पीरु की रायपुर स्थित घर, फुरकान की छुटमुलपुर और फिरोज की गिरफ्तारी नोएडा से दर्शाकर पूरी कार्रवाई को लीगली अमलीजामा पहनाया गया। पुलिस को पता था कि यदि गिरफ्तारी स्थल को बदला गया तो सुनवाई के दौरान लुटेरे पुलिस कार्रवाई को कटघरे में खड़ा कर सकते हैं। दूसरा पुलिस ने लुटेरों पर शिंकजा कसने को वैज्ञानिक और आधुनिक तकनीक से कई साक्ष्य जुटाए हैं। विवेचना की गुणवत्ता बढ़ाने को पुलिस के पुराने दिग्गजों की भी मदद ली जा रही है।
अभिमन्यु क्रिकेट एकेडमी के मालिक आरपी ईश्वरन की कोठी से लूटपाट के दौरान उठाया गया डीवीआर बदमाश देवबंद और मुजफ्फरनगर के बीच जंगल में फेंक गए थे। बदमाशाें से की गई पूछताछ में यह बात सामने आई है। हालांकि रात का अंधेरा होने के कारण वह सटीक जगह नहीं बता पा रहे हैं। सूत्रों का कहना है डीवीआर मिलने पर लुटेरों की पूरी करतूत उजागर होगी। कैमरे में बदमाशों के आने की लाइव तस्वीरें कैद हो गई थी।
पुलिस ने बदमाशों से पूछताछ की तो पता चला कि उन्हें इतना याद है कि देवबंद का टोल प्लाजा निकलने के बाद उन्हाेंने डीवीआर जंगल में फेंक दिया था। उस समय उनकी कार की स्पीड 100 किलोमीटर प्रति घंटा रही होगी। क्योंकि उन्हें तेजी से सुरक्षित ठिकाने पर पहुंचने की जल्दी थी। दून से गाजियाबाद के हिंडन नदी पुल के सफर को उन्होंने करीब तीन घंटे 15 मिनट में पूरा किया था। एसपी सिटी श्वेता चौबे ने बताया कि बदमाशों को रिमांड पर लेकर जल्द डीवीआर बरामद कराने का प्रयास किया जाएगा।
वीरेंद्र और अदनान को रिमांड पर लेगी पुलिस
कोठी से लूटपाट का ज्यादा माल अदनान के हिस्से में आने की जानकारी पुलिस को लगी है। विवेचक बृहस्पतिवार को अदनान और वीरेंद्र ठाकुर को पुलिस रिमांड पर लेने को कोर्ट में प्रार्थनापत्र देंगे। डकैती को लेकर कई ऐसे सवाल है, जिनके जवाब मिलने अभी बाकी हैं। गिरोह की कमान वैसे तो बीएसएफ से बर्खास्त डिप्टी कमांडेंट वीरेंद्र ठाकुर के नाम बताई गई है, लेकिन गिरोह में अदनान सबसे ज्यादा पावरफुल स्थिति में है। कोठी की रेकी वीरेंद्र ठाकुर करके गया था। लेकिन लूटपाट की पूरी कमान अदनान के हाथ में रही। पूछताछ के दौरान पुलिस को यह इनपुट मिला है कि लूट का ज्यादा माल अदनान के हिस्से में आया है। पुलिस अधीक्षक नगर श्वेता चौबे ने बताया कि लूट में गए माल की रिकवरी, डीवीआर और घटना में प्रयुक्त हथियारों की बरामदगी के लिए अदनान और वीरेंद्र को रिमांड पर लेने का प्रयास किया जाएगा। बृहस्पतिवार को विवेचक कोर्ट में पुलिस रिमांड को प्रार्थना पत्र देगा।
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